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फिल्म समीक्षा : तीन (TE3N)

अमिताभ बच्चन, विद्या बालन और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को एकसाथ बड़े परदे पर देखने के मोह के संवरण नहीं कर पा रहे हैं और एक बार फिर निर्देशक ऋभु दासगुप्ता और अमिताभ बच्चन की जुगलबंदी देखना चाहते हैं, तो उससे पहले फिल्म 'तीन' का रिव्यू पढ़ लें।

अमिताभ बच्चन, विद्या बालन और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को एकसाथ बड़े परदे पर देखने के मोह के संवरण नहीं कर पा रहे हैं,तो उससे पहले फिल्म 'तीन' का रिव्यू पढ़ लें।

फिल्म: तीन (TE3N)
निर्माताः सुजॉय घोष, रिलायंस एंटरटेनमेंट, एंडमॉल शाइन इंडिया, सुरेश नायर, समीर राजेंद्रन
निर्देशकः ऋभु दासगुप्ता
कलाकार: अमिताभ बच्चन, नवाजुद्दीन सिद्दिकी, विद्या बालन, सब्यसाची चक्रवर्ती, पद्मावती राव
संगीतकार: क्लिंटन सेरेजो
जॉनर: थ्रिलर
रेटिंग: 3/5 (*** )

निर्देशक ऋभु दासगुप्ता और अमिताभ बच्चन की जुगलबंदी टीवी शो 'युद्ध' के बाद फिल्म 'TE3N' में देखने को मिली। अमिताभ के साथ इसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी और विद्या बालन की भी मौजूदगी दर्शकों को थिएटर तक खींचने में कामयाब हो सकती है।

कोरियाई फिल्म 'मोंटाज' से प्रभावित यह फिल्म दर्शकों की  उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।

कहानी

यह कहानी जॉन बिस्वास (अमिताभ बच्चन) की है, जो कोलकाता के एंग्लो इंडियन हैं। वे अपनी पोती के कातिलों का सुराग ढूंढ रहे हैं। इसके लिए वे हर दिन पुलिस स्टेशन जाकर इंस्पेक्टर सरिता (विद्या बालन) से मुलाक़ात भी करते हैं।

साथ ही कभी ज़ॉन बिस्वास की पोती को खोजने की मिशन में रहे मार्टिन दास, जो अब फादर मार्टिन दास (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) बन चुके हैं, उनसे से भी बार-बार गुहार लगाते हैं। क्या है जॉन बिस्वास की पोती के कत्ल का सच? जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

निर्देशन

फिल्म का निर्देशन बढ़िया है। खासतौर से कोलकाता की गलियों और सड़कों को बखूबी दर्शाया गया है। फिल्म की कहानी रहस्य से भरी हुई है।

हालांकि, इंटरवल से पहले का हिस्सा थोड़ा और उबाऊ है, लेकिन सेकंड हाफ में कहानी में कई सारे ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं, जो आपको सोचने पर आपको मजबूर करते हैं कि आखिर कातिल कौन है?  वहीं फिल्म की  सिनेमैटोग्राफी भी बहुत दिलचस्प है।

अभिनय

दादा के रूप में अमिताभ बच्चन ने कमाल दिखाया है। वहीं, हरफनमौला नवाजुद्दीन सिद्दीकी का किरदार बहुत ही उम्दा है और नवाज ने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया भी है। लेकिन कहीं कहीं उनके उच्चारण चुभते हैं। विद्या बालन का छोटा, लेकिन अहम किरदार है। बाकी कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है।

संगीत

फिल्म में क्लिंटन सेरेजो ने लाजवाब संगीत दिया है़, जो कहानी के साथ सटीक लगता है। विशाल और अमिताभ की आवाज़ का जादू भी खूब चला है। 

खास बात

सुजॉय घोष फिल्म के प्रोड्यूसर हैं और वे जानते हैं कि कम बजट में बड़ी फिल्म कैसे बनाई जाती है। 'कहानी' की तरह दांतों तले उंगलियां दबाने के मौके तो नदारद ही हैं। हालांकि, अमिताभ-नवाज-विद्या की तिकड़ी को देखना ठीक है।  हिंदी थ्रिलर फिल्मों को पसंद करते हैं, तो एक दफा जरूर जाकर देख सकते हैं। 

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