सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

‘मणिकार्णिका’ में कंगना रनौत की एक्टिंग और डायरेक्शन तो उम्दा है, लेकिन एडिंटिंग में रह गई थोड़ी ‘कसर’

जब भी पीरियड ड्रामा फिल्मों की बात आती है, तो ज़ेहन में के आसिफ, संजय लीला भंसाली और आशुतोष गोवारिकर के बाद अब एसएस राजामौली का नाम आता है। इसी जॉनर में एक नई फिल्म आई है, जो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की अमर गाथा को सिल्वर स्क्रीन पर पेश कर रही है। नाम है ‘मणिकार्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’। फिल्म को पहले कृष और बाद में कंगना रनौत ने निर्देशित किया है। कई मायनों में यह फिल्म खास है, लेकिन दर्शकों के लिए कैसा अनुभव होने वाला है, आइए करते हैं समीक्षा। 
हाल की पोस्ट

फिल्म ‘ठाकरे’ में नवाज़ुद्दीन के एक्सप्रेशन तो ठीक है, लेकिन जब वो डायलॉग बोलते हैं तो...

महाराष्ट्र से लेकर भारत राजनीति में भूचाल लाने वाले बाला साहेब ठाकरे की बायोपिक इस सप्ताह रिलीज़ हुई है। इसमें साल 1960 से लेकर बाबरी मस्जिद ढहाने के कुछ सालों बाद के घटनाक्रम को दिखाया गया है। फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी ने बाला साहेब ठाकरे की भूमिका निभाई है। क्या कुछ खास है फिल्म में आइए जानते हैं। 

फिल्म समीक्षा : ठग्स ऑफ हिन्दोस्तां

एक कहावत है ‘नाम बड़े दर्शन छोटे’ या यूं कहिए ‘ऊंची दुकान फीका पकवान’। आमिर खान, अमिताभ बच्चन सरीखे बड़े नाम के साथ यशराज फिल्म्स सरीखा बैनर कमज़ोर कहानी और बेजान स्क्रीनप्ले की बलि चढ़ गया। बाकी क्या कुछ देखने लायक है और क्या कमज़ोरियां हैं, जानते हैं इस समीक्षा में।

फिल्म समीक्षा : अंधाधुन

कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनके अगले सीन को देखने की हिम्मत नहीं होती और उसे देखे बिना चैन भी नहीं पड़ता। ऐसी ही फिल्म इस सप्ताह भी रिलीज़ हुई है। उस फिल्म का नाम है ‘अंधाधुन’। आयुष्मान खुराना, राधिका आप्टे, तब्बू सरीखे कलाकारों से सजी इस फिल्म को श्रीराम राघवन ने बनाया है। फिर आइए करते हैं समीक्षा। 

फिल्म समीक्षा : लवयात्री

सलमान खान ने अपने होम प्रोडक्शन के तले फिल्म बनाई है, जिसका नाम है ‘लवयात्री’। इस फिल्म से उनके जीजा जी यानी अर्पिता खान के पति आयुष शर्मा का सिने करियर शुरू हो गया। साफ-साफ कहें, तो आयुष शर्मा की डेब्यू मूवी है। फिर आइए जानते हैं, कैसी बनी है फिल्म। 

फिल्म समीक्षा : पटाखा

एक बार फिर विशाल भारद्वाज अपने चिर-परिचित अंदाज़ यानी कि ठेठ देसीपन के साथ हाजिर हैं। इस बार वो 'पटाखा' लेकर आए हैं। चरण सिंह पथिक के उपन्यास ‘दो बहनें’ पर बनी इस फिल्म में सान्या मल्होत्रा, राधिका मदन, सुनील ग्रोवर और विजय राज सरीखे कलाकार हैं। अब यह फिल्म कैसी बनी है, आइए करते हैं इसकी समीक्षा।
निर्माता : विशाल,रेखा भारद्वाज,ईशान सक्सेना,अजय कपूर 
निर्देशक : विशाल भारद्वाज
कलाकार : सान्या मल्होत्रा, राधिका मदान, सुनील ग्रोवर, विजय राज,नमित दास
संगीतकार : विशाल भारद्वाज 
जॉनर :कॉमेडी -ड्रामा
रेटिंग :4/ 5 

कहानी  ‘बड़की’ चंपा कुमारी और ‘छुटकी’ गेंदा कुमारी दो बहनें हैं और दोनों को एक-दूजे से इतनी नफरत रहती है कि हमेशा गुत्थम-गुत्थी ही करती रहती थीं। 
इन दो बहनों का शगल लड़ना है, वैसे ही एक ऐसा बंदा है, जिसको इनकी लड़ाई इतनी भाती है कि डिब्बा-कनस्तर पीट-पीट कर खुश होता है। उसका नाम है ‘डिप्पर’। 
एक-दूसरे की जान की प्यासी इन बहनों की आंखों में सपने भी पलते हैं। एक को अपना डेयरी खोलना है, जो दूजी को टीचर बनना है। 
इनके सपने में पलीता ‘बापू’ की मजबूरी से लगता है। दरअसल, ‘बापू’ को अचानक …

फिल्म समीक्षा: सुई धागा

‘सुई-धागा’ फिल्म कहानी है मौजी (वरुण धवन) और उसकी पत्नी ममता (अनुष्का शर्मा) की। मौजी अपना परिवार चलाने के लिए एक शोरूम में काम करता है।‘दम लगा के हईशा’ बना चुके शरत कटारिया अब  फिल्म ‘सुई-धागा’ लेकर आए हैं। यह फिल्म वर्तमान उपनगरीय परिवेश में रहने वाले वाले किरदारों के सादगी भरे जीवन की कहानी कहती है।