Mughal-E-Azam : बड़े गुलाम अली खान ने दो सॉन्ग्स के लिए ली थी 50 हज़ार फीस

जब बड़े से बड़े सिंगर की 500 से 1000 रुपए पर सॉन्ग फीस रहा करती थी, तब बड़े गुलाम अली खान ने फिल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' में गाने के लिए 25 हज़ार एक रुपए वसूले थे। के आसिफ के इस फैसले को लेकर संगीतकार नौशाद भी सकते में थे, लेकिन कुछ कह नहीं सकते थे, क्योंकि निर्देशक का फैसला आखिरी फैसला। हालांकि, के आसिफ के इस फैसले का हासिल जो मिला, वो कम कमाल न था। पढ़िए इस दिलचस्प क़िस्से को।

Bade ghulam ali khan in 'Mughal e azam'
फिल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' को रिलीज़ हुए साठ साल हो गए हैं, लेकिन आज भी इसकी भव्यता, संगीत सिनेप्रेमियों के दिलों में ताजा है। उस ज़माने में तकरीबन डेढ़ लाख की लागत में बनी फिल्म ने का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन तीन करोड़ बताया जाता है। 

इस फिल्म को न सिर्फ एक्टिंग, बल्कि भव्य सेट, डायलॉग्स और संगीत के लिए याद किया जाता है। फिल्म के गीत शकील बदायुनी ने लिखे थे, जबकि स्क्रिप्ट खुद के आसिफ ने लिखा था। इस फिल्म को लेकर आसिफ किसी भी मामले में समझौता करने को तैयार नहीं थे। तभी तो उस ज़माने में जब गायक पांच सौ से हज़ार रुपए लेकर गाना गाते थे, उस समय में एक गाने के लिए पच्चीस हजार तक की फीस दी। 

दरअसल, क़िस्सा यह है कि फिल्म 'मुग़ल-ए- आज़म' में एक गीत में तानसेन को गाते हुए दिखाया जाना था। के आसिफ तानसेन की आवाज के लिए क्लासिकल सिंगर उस्ताद बड़े गुलाम अली खान को लेना चाहते थे। के आसिफ ने अपनी इस इच्छा को संगीतकार नौशाद को बताया। नौशाद ने कहा कि बड़े गुलाम आली खान फिल्मों में गाने के सख्त खिलाफ हैं। के आसिफ नहीं माने और जिद कर गए कि यह गाना तो बड़े गुलाम अली खान ही गाएंगे। 

संगीतकार नौशाद ने कई बार बड़े गुलाम अली खान को मनाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। एक दिन के आसिफ खुद नौशाद के साथ बड़े गुलाम अली खान से मिलने उनके घर पहुंच गए। के आसिफ ने बड़े गुलाम अली खान से कहा कि 'ये गाना तो आपको को ही गाना पड़ेगा।'

बड़े गुलाम अली खान को सिगरेट पीने वालों से सख्त नफरत थी। वहीं के आसिफ लगातार सिगरेट पी रहे थे, जिससे बड़े गुलाम अली खान को गुस्सा आ रहा था। ऊपर से फिल्मों में गाने और वो भी तीन मिनट में शास्त्रीय गायन को लेकर वो पहले से ही बिदके हुए थे। इसके बाद आसिफ के हाथ की सिगरेट से उनका पारा लगातार चढ़ता जा रहा था।

तिलमिलाए बड़े गुलाम अली खान ने कहा, 'आप अगर इस गाने के 25 हजार रूपये भी देंगे, तो भी न गाएंगे।' जवाब में के आसिफ ने कहा, 'ठीक है तो फिर मैं इस गाने के लिए आपको 25 हजार 1 रूपये देता हूं, अब तो इंकार नहीं करेंगे।' 

के आसिफ के इस डेडिकेशन को देखने के बाद बड़े गुलाम अली खान को हां कहना पड़ गया और इस तरह से फिल्म में उनका गाना तय हो गया। के आसिफ ने कहा, 'गुलाम साहब आप बेशकीमती हैं। यह लीजिए 10 हज़ार एडवांस।' उस जमाने में बड़े बडे सिंगर भी एक गाने 500 या 1000 रूपये से ज्यादा नहीं लिया करते थे।

गाने की बात फाइनल होने के बाद उस्ताद बड़े गुलाम अली खान से दोनों विदा ली। लौटते समय संगीतकार नौशाद ने के आसिफ से कहा, 'ये क्या किया आपने, इतनी बड़ी अमाउंट एक गाने के लिए दे दी।' 

इस पर के आसिफ ने संगीतकार नौशाद के कंधे पर हाथ रखकर कहा, 'मुगल-ए- आजम को देखते हुए यह कोई बड़ी रकम नहीं है, 'मुगल-ए- आजम' जैसे फिल्में बार-बार नहीं बना करती है।'

बता दें कि बड़े गुलाम अली खान का गाना फिल्म में सलीम और अनारकली के बीच हो रहे प्रणय सीन के बैकग्राउंड में बजता है। उनकी आवाज़ में दो गाने हैं फिल्म में। एक है 'प्रेम जोगन बन के' और दूसरा है, 'शुभ दिन आयो राज दुलारा'। दो गानों के लिए बड़े गुलाम अली खान ने 50 हजार रुपए का पारिश्रमिक लिया था।

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