सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

फिल्म समीक्षा : अंधाधुन

कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनके अगले सीन को देखने की हिम्मत नहीं होती और उसे देखे बिना चैन भी नहीं पड़ता। ऐसी ही फिल्म इस सप्ताह भी रिलीज़ हुई है। उस फिल्म का नाम है ‘अंधाधुन’। आयुष्मान खुराना, राधिका आप्टे, तब्बू सरीखे कलाकारों से सजी इस फिल्म को श्रीराम राघवन ने बनाया है। फिर आइए करते हैं समीक्षा। 

फिल्म अंधाधुन में

फिल्म : अंधाधुन

निर्माता : वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स 

निर्देशक : श्रीराम राघवन

कलाकार : आयुष्मान खुराना, तब्बू, राधिका आप्टे, अनिल धवन

स्टार्स : 4 

श्रीराम राघवन अलग तरह की सिनेमा बनाने वालों की कतार में आते हैं। गिनी-चुनी फिल्में ही निर्देशित करते हैं। अब तक आई पांच फिल्मों में ‘जॉनी गद्दार’, ‘एक हसीना थी’, ‘एजेंट विनोद’, ‘बदलापुर’ के बाद ‘अंधाधुन’ लेकर आए हैं। फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद ही फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गई थी। 

कहानी 
यह कहानी एक पियानो प्लेयर (आयुष्मान खुराना) की है, जो अंधा है। वो अपनी गर्लफ्रेंड सोफी (राधिका आप्टे) के रेस्तरां में पियानो बजाकर गुजारा करता है। वहीं, दूसरी तरफ सिमी (तब्बू) हैं, जिनको अमीर बनने के लिए एक प्रमोद सिन्हा (अनिल धवन) से शादी करनी पड़ती है। एक अमीर शख्त की पत्नी की पहचान हासिल कर लेती हैं। 

सबकुछ ठीक चल रहा होता है, तभी इसी बीच एक दिन अचानक प्रमोद सिन्हा की मौत हो जाती है। प्रमोद की मौत एक मर्डर मिस्ट्री बन जाती है। इस मर्डर का इल्ज़ाम आयुष्मान खुराना पर भी लगता है। हालांकि वो अंधा है, तो ऐसे में उसने कैसे ये मर्डर देखा होगा, या अंधेपन की वजह से उसका चश्मदीद नहीं हो सकता है। यहीं से कहानी एक अलग मोड़ लेने लगती है। कई सारे ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं। 

आखिरकार क्या होता है, कत्ल किसने किया है और कौन है सबसे बड़ा दोषी, ये सब कुछ जानने के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी।

समीक्षा 
फिल्म की कहानी दमदार है, तो स्क्रीनप्ले भी जबरदस्त है। इन सबसे ख़ास बात श्रीराम राघवन की स्टोरीटेलिंग टेक्नीक। हिन्दी सिनेमा की सबसे अलहदा थ्रिलर का खिताब इस फिल्म को दिया जा सकता है। 

फिल्म जिस तरह से ट्विस्ट एंड टर्न्स आते हैं, ऑडियंस को चौंका जाते हैं और थ्रिलर से यही तो उम्मीद की जाती है। अनप्रेडेक्टेबल। 

अभिनय की बात करें, तो फिल्म में आयुष्मा का काम बेहतरीन रहा है। श्रीराम राघवन ने उनसे उम्दा काम निकलवाया है। अरसे बाद पर्दे पर अनिल धवन नज़र आए हैं। उनका पर्दे पर नज़र आना सुखद रहा। राधिका और तब्बू भी अपने किरदार में जंचे हैं। 

वैसे, तो ओवरऑल फिल्म अच्छी है, लेकिन सेकेंड हाफ में कहानी कुछ डगमग सी होती है। फिर भी यह बेहतरीन थ्रिलर्स में से एक है। 

ख़ास बात
यदि आप थ्रिलर फिल्मों के शौकीन है, तो फिर यह फिल्म ‘मस्ट वॉच’ फिल्म है। इसे सिनेमाघर में जाकर देखने का अपना ही मजा है।