फिल्म समीक्षा : तानाजी: द अनसंग वॉरियर



अजय देवगन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो ‘अनसंग वॉरियर्स’ पर फिल्मों की सीरीज़ बनाना चाहते हैं और ‘तानाजी’ उसकी पहली कड़ी है। अजय देवगन के साथ से फिल्म में काजोल, सैफ अली खान और शरत केलकर मुख्य भूमिकाओं में हैं और यह फिल्म थ्रीडी में बनी है। ओम राउत के निर्देशन में बनी इस बॉयोग्राफिकल पीरियड एक्शन फिल्म की आइए करते हैं समीक्षा। 

फिल्म  तानाजी: द अनसंग वॉरियर में अजय देवगन
फिल्म : तानाजी : द अनसंग वॉरियर
निर्माता : अजय देवगन, भूषण कुमार और किशन कुमार
निर्देशक : आम राउत 
कलाकार : अजय देवगन, काजोल, सैफ अली खान, शरद केलकर, जगपति बाबू 
जॉनर : बॉयोग्राफिकल पीरियड एक्शन
रेटिंग : 4/5 

संजय लीला भंसाली और आशुतोष गोवारिकर ऐसे निर्देशक हैं, जो हिस्टॉरिकल ड्रामा बनाने के महारथी माने जाते हैं, लेकिन अब हिस्टॉरिकल ड्रामा में हाथ आजमाने ओम राउत आ गए हैं। अजय देवगन, सैफ अली खान और काजोल सरीखे कलाकारों के साथ मिलकर उन्होंने ‘अनसंग वॉरियर’ तानाजी मालसुरे की कहानी को पर्दे पर उतारा है। उनकी कोशिश कितनी कामयाब हुई है, आइए देखते हैं। 

कहानी 

फिल्म की कहानी इतिहास के उस पन्ने से शुरू होती है, जब औरंगजेब (ल्यूक केनी) पूरे हिन्दोस्तां पर मुगलिया परचम फहराने की कोशिशों में जुटा हुआ था। यह बात सत्रहवीं शताब्दी की है। उधर शिवाजी महाराज (शरद केलकर) के परम मित्र और शूरवीर योद्धा सूबेदार तानाजी मालसुरे (अजय देवगन) अपनी पत्नी सावित्रीबाई (काजोल) के साथ अपने बेटे की शादी की तैयारियों में व्यस्त हैं। वह इस बात से अंजान हैं कि 23 किलों को मुगलों के हवाले कर देने के बावजूद मुगलिया सल्तनत की भूख अभी भी शांत नहीं हुई है। 

ऐसे में औरंगज़ेब अपने ख़ास और विश्वासपात्र उदयभानु राठौर (सैफ अली खान) को भारी-भरकम सेना के साथ मराठा साम्राज्य के सफाया का फरमान सुनाता है। 

इस बात की जानकारी लगते ही शिवाजी महाराज तानाजी मालसुरे को इस बारे में बताते हैं और तानाजी अपने बेटे की शादी की परवाह किए बिना ही भगवा पहन कर उदयभानु से लौहा लेने निकल पड़ते हैं। 

क्या तानाजी, उदयभानु को खत्म कर पाते हैं या क्या कुछ होता है, जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी। 

समीक्षा 

इतिहास के उस पन्ने को खोलना और फिर उसे पर्दे पर बेजोड़ तरीक़े से फिल्माने के लिए ओम राउत की तारीफ होनी चाहिए। जबरदस्त सेट्स और कमाल के स्पेशल इफैक्ट्स तो फिल्म में देखने को मिल ही रही है, लेकिन इस पर चार-चाँद सैफ अली खान, शरद केलकर, अजय देवगन और काजोल की उम्दा अदायगी ने लगा दिया है। 

पर्दे पर पहली फ्रेम से लेकर आखिरी फ्रेम तक में अजय देवगन नहीं, बल्कि तानाजी मालसुरे नज़र आएंगे। हालांकि, एकाध सीन में अजय पर सैफ अली खान भारी पड़ते नज़र आए। वहीं जबरदस्त आवाज़ के मालिक शरद केलकर ‘शिवाजी’ बने काफी फबते हैं। 

फिल्म थ्रीडी में बनी है। तकनीक के मामले में भी फिल्म ने बाजी मार ली है। कई बार फिल्म देखते हुए लगा कि जैसे पर्दे से तीर निकल कर आंखों में चुभने वाला हो, जो दर्शकों को एकबारगी अचकचाने पर मजबूर तो कर ही देगा। 

ओम राउत की यह पहली हिन्दी फिल्म है। इस से पहले उन्होंने मराठी फिल्मों का निर्देशन किया है। संगीत के मामले में भी फिल्म अच्छी है। 

ख़ास बात 

हिस्टॉरिकल ड्रामा फिल्मों के शौकीन हैं, तो दमदार परफॉर्मेंस से भरी और बेहतरीन निर्देशन वाली यह फिल्म ज़रूर देखने जाएं। साथ ही यह फिल्म थ्रीडी में है, तो आपको गजब का अनुभव भी मिलने वाला है।

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