राजेश खन्ना की यह फिल्म थी बिना इंटरवल वाली पहली फिल्म

राजेश खन्ना की फिल्म 'इत्तेफाक़' बिना इंटरवल वाली पहली फिल्म है। इसमें न तो इंटरवल था और ना ही गाने। यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी यह फिल्म साल 1969 में रिलीज़ हुई थी, जिसमें राजेश खन्ना के अलावा नंदा, बिंदु, इफ्तेखार, सुजीत कुमार सरीखे कलाकार थे। 

rajesh khanna in film 'ittefaq'
बॉलीवुड इतिहात की पहली बिना इंटरवल वाली फिल्म का नाम है 'इत्तेफाक़'। राजेश खन्ना की मुख्य भूमिका वाली फिल्म न तो इंटरवल था और ना ही गाने। फिर भी इस फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया। यहां तक कि इस फिल्म को रीमेक किया गया, जिसमें सोनाक्षी सिन्हा, सिद्धार्थ मल्होत्रा और अक्षय खन्ना सरीखे कलाकर थे। 

ख़ैर, साल 1969 में आई 'इत्तेफाक़' की बात करते हैं। यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म को बीआर चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म में राजेश खन्ना के अलावा बिन्दु, सुजीत कुमार, इफ्तेखार सरीखे कलाकार थे। 

यश चोपड़ा को इस फिल्म का आइडिया गुजराती नाटक 'धूमस' से मिला था, जो इंग्लिश प्ले 'साइनपोस्ट टू मर्डर' से प्रेरित था। अब यश चोपड़ा को वो नाटक इतना पसंद आया कि अगले ही दिन अपने साथ स्क्रिप्ट राइटर्स को अपने साथ वो नाटक दिखाने ले गए और कहा इसन नाटक पर फिल्म बनाते हैं। 

इस फिल्म के लिए राजेश खन्ना को साइन कर लिया गया, जो कुछ फिल्मों ही पुराने थे। या यूं कहिए कि नए-नए थे। अब हीरो तो मिल गया, फिल्म के लिए हीरोइन की तलाश तेज हो गई। 

हीरोइन भी ऐसी, जो फिल्म में खूनी की भूमिका को निभा सके, लेकिन दर्शकों को फिल्म के क्लाइमैक्स तक अपने मासूम चेहरे से यह जाहिर न होने दे कि उसने ही कत्ल किया है। काफी विचार विमर्श के बाद नंदा को इसके लिए फाइनल किया गया। 

लीड कास्ट फाइनल होने के बाद फिल्म की शूटिंग भी जल्दी ही शुरू कर दी गई, जितनी जल्दी शूटिंग शुरु हुई उतनी ही जल्दी पूरी भी हो गई। सिर्फ बीस दिनों में फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई थी। 

फटाफट बनी फिल्म को जब रिलीज़ किया गया, तो दर्शकों को यह अलग किस्म की फिल्म काफी पसंद आई। बिना इंटरवल वाली फिल्म को शुरू से लेकर आखिरी तक एक साथ ही देखा जा सकता था। बिना इंटरवल वाली फिल्म में गाने भी नहीं थी। 

अब फिल्म की कहानी की बात करें, तो फिल्म में राजेश खन्ना एक पेंटर की भूमिका में थे, जिनपर उनकी अमीर पत्नी के कत्ल का इल्ज़ाम रहता है। पुलिस से छुपते-छुपाते वो नंदा के बंगले में पहुंच जाते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें अहसास होता है कि घर की मालकिन भी उनसे कुछ छुपा रही है। दरअसल, नंदा उर्फ घर की मालकिन अपने पति की लाश तक राजेश को नहीं पहुंचने देना चाहती।

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