Pati Patni Aur Woh Review: टाइटल पुराना, लेकिन कहानी एकदम नई-नवेली



एमएक्स प्लेयर पर रिलीज़ वेब सीरीज़ 'पति, पत्नी और वो' रिलीज हुई है। मधुरा के बैकड्रॉप पर बनी इस सीरीज की कहानी इतनी दिलचस्प है कि एक बार आप इसे देखना शुरू करेंगे, तो फिर आखिर एपिसोड को देखने के बाद अगले सीज़न का इंतज़ार करने लगेंगे। अनंत विधात, विन्नी अरोड़ा और रिया सेन की मुख्य भूमिका वाली सीरीज़ को निशीथ नीरव नीलकंठ लेकर आए हैं।

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वेब सीरीज़ : पति, पत्नी और वो
क्रियेटर : निशीथ नीरव नीलकंठ
प्रोड्यूसर्स : टू नाइस मैन मीडियावर्क
कलाकार : अनंत विधात शर्मा, रिया सेन, विन्नी अरोड़ा, शक्षम शुक्ला, जसपाल शर्मा, अनिल शर्मा
ओटीटी : एम एक्स प्लेयर
एपिसोड : दस
रेटिंग : 3.5/5

परिवार के साथ बैठ कर कुछ एंटरटेनिंग देखने की इच्छा हो, तो एमएक्स प्लेयर की वेब सीरीज़ 'पति पत्नी और वो' बढ़िया ऑप्शन है। निशीथ नीरव नीलकंठ की इस वेब सीरीज़ का टाइल भले ही पुराना हो, लेकिन कहानी बिलकुल नई है।

कहानी

मधुरा में एक छोटी-सी दुकान चलाने वाले मोहन (अनंत विधात शर्मा) की पत्नी सुरभि (विन्नी अरोड़ा) की असमय मृत्यु हो जाती है। अब मोहन पत्नी की मृत्यु के तेरह दिन के भीतर ही शादी करने के लिए लड़की तलाशने लगता है। इसमें उसका पक्का दोस्त थ्री जी (शक्षम शर्मा) मदद करता है। पत्नी के मरने के तेरह दिन के भीतर ही मोहन की शादी को लेकर उतावलापन किसी को समझ नहीं आता, लेकिन फिर भी 'आदमी अच्छा' है, सोच कर लोग सवाल भी नहीं करते। हालांकि, छोटे शहरों की आम बातें, खाना-फुसी खूब होती है।

वहीं मोहन का साला यानी सुरभि का भाई कुक्कु (जसपाल शर्मा) को भी अपने जीजा की हरकते कुछ खास पसंद नहीं है, लेकिन दीदी के नाम से खुली दुकान में अपनी हिस्सेदारी बराबर जताता रहता है।

अब शादी के लिए लड़की देखने निकले मोहन, रिमझिम (रिया सेन) से शादी का फैसला लेते हैं, लेकिन वो भी बिना देखे। थ्री जी को अजीब लगता है, लेकिन मोहन ने फैसला कर लिया है। अब पत्नी सुरभि की तेरहीं और मोहन की दूसरी शादी एक ही दिन होना तय होती है। पत्नी की मुक्ति के लिए हवन और फिर अपनी शादी के सात फेरे लेते हैं।

शादी हो गई है, नई दुल्हन सजे-सजाए कमरे में बैठी हुई है। मोहन के साथ उनकी पहली पत्नी सुरभि का आत्मा भी नई-नवेली दुल्हन को देखने जाती है, क्योंकि सुरभि की आत्मा तभी मुक्त हो सकती है, जब वो देख ले कि उसके मोहन को कोई खयाल रखने वाला आ गया है।

जैसे-जैसे घूंघट उठता, वैसे-वैसे सुरभि मुक्त होने लगती है, लेकिन घूंघट पूरा हटते ही सुरभि की आत्मा मुक्त होने के बजाय रूक जाती है, क्योंकि उसे लगता है कि नई दुल्हन या दूसरी पत्नी अच्छी नहीं है। वहीं मोहन अपनी दूसरी पत्नी के रूप को देखकर मुग्ध हो जाता है। सीधे-सादे मोहन के मुंह से सीटी निकलने लगती है।

सुरभि, मोहन से तुरंत बाहर जाकर सोने को कहती है। रिमझिम, मोहन के करीब आती है, तो सुरभि अड़ंगा डालती है। आखिर में मोहन, रिमझिम के रिश्ते की 'वो' का क्या अंजाम होता है, जानने के लिए इस सीरीज़ को देख ही डालिए।

समीक्षा

इस सीरीज़ में सबसे बड़ी चीज़ खटकती है, वह है इसमें जबरदस्ती संवादों में लोकल भाषा का ठूंसा जाना, जो सीरीज़ के आगे बढ़ने के साथ खत्म हो जाता है। मोहन, जब अपनी दूसरी शादी के लिए लड़की देखने बनारस जाता है। बनारस में रहने वाले कुछ-कुछ भोपाली टोन में बोलते दिखते हैं। बनारसी न सही, हिन्दी में ही डायलॉग बुलवा लेते। वहीं मधुरा का टच देने के लिए भी वही किया गया।

हालांकि, कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है। इन बातों से आपका ध्यान हटने लगता है। कुछ सीन बेजा घुसाए हुए से लगते हैं, लेकिन कुल-मिलाकर निर्देशन में झोल-झाल को बेहतरीन कहानी और जबरदस्त आदाकारी ने संभाल लिया है।

एक्टिंग की बात करें, तो सबसे पहला जिक्र अनंत विधात का करते हैं। सलमान खान की 'सुल्तान' में नज़र आ चुके अनंत ने इस सीरीज़ में अपने किरदार को इस तरह से पकड़ कर रखा है कि शुरू से लेकर आखिर तक उससे ज़रा भी डगमगाए नहीं है। सीरीयस सींस से लेकर कॉमेडी शॉट्स में जबरदस्त टाइमिंग है। पूरे वक्त चेहरे पर बेबसी और बेचारगी दिखाई देती रहती है।

फिर हैं विन्नी अरोड़ा। सुरभि के किरदार में विन्ना खूब जंची हैं। उन्हें देखकर लगता है कि आस-पास की कोई महिला हैं। अपने किरदार को बढ़िया तरीके से निभाया है।

रिमझिम बनी रिया सेन ने अपने किरदार को अच्छी तरह से निभाने की कोशिश की है। खूबसूरत हैं, बड़ी-बड़ी आंखों वाली बंगाली बाला ने इस बार ठीक-ठाक एक्टिंग कर ली है।

वहीं थ्री जी बने शक्षम शुक्ला ने बेहतरीन अभिनय किया है। जसपाल शर्मा और अनिल शर्मा ने भी अपनी-अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभाई है।

ख़ास बात

पूरे परिवार के साथ बैठ कर देखने लायक सीरीज है। टाइटल देखकर कुछ लोग इसमें एडल्ट जोक की कल्पना कर सकते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है। साफ-सुधरी मंनोरंजन से भरपूर है यह सीरीज।

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