सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

फिल्म समीक्षा : बजरंगी भाईजान

अब बात करें 'बजरंगी भाईजान' के कहानी की, तो आपको कहानी में कुछ नयापन नहीं मिलेगा. फ़िल्म की शुरुआत में ही क्लामैक्स का अंदाज़ा हो जाता है, बावज़ूद इसके दर्शक पूरे पौने तीन घंटे तक ख़ुद को इससे बंधे हुए महसूस करेंगे. इस पूरा श्रेय सलमान के साथ निर्देशक कबीर ख़ान को जाता है!

बजरंगी भाईजान फ़िल्म शुरुआत में ही क्लामैक्स का अंदाज़ा हो जाता है, बावज़ूद इसके दर्शक पूरे पौने तीन घंटे तक ख़ुद को इससे बंधे हुए महसूस करेंगे

कलाकार:

 सलमान खान, करीना कपूर खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, ओमपुरी, अदनान सामी, हर्षाली मल्होत्रा

निर्देशक:

 कबीर ख़ान

मुंबई. बीते कई सालों की तरह इस बार भी सलमान ख़ान अपने फ़ैन्स के लिए ईद पर ख़ास सौगात 'बजरंगी भाईजान' के रूप में लाए हैं. ग़ौर करें तो आप पाएंगे कि प्रभुदेवा के निर्देशन में बनी 'वॉन्टेड' के बाद दबंग ख़ान की जो छवि बनी है, कमोबेश उसे ही भुनाने में लगे हुए हैं. तभी तो उन्होंने ऐसे किरदारों का चुनाव शुरू किया जो उनके इमेज को पूरी तरह सूट करे. 'दबंग-2', 'बॉडीगार्ड', 'रेडी', 'एक था टाईगर' और 'किक' को मिली कामयाबी की वजह से, बॉक्स आफ़िस को भी सलमान को हिट की गारंटी ही लगने लगे हैं. हालांकि, इन फ़िल्मों को आलोचकों से अच्छी रेटिंग तो नहीं मिली, लेकिन दर्शकों  का भरपूर प्यार मिला.

मामूली सी कहानी को ऐसा ट्रीटमेंट दिया है कि यह दर्शकों  बांधने में कामयाब रही है. कश्मीर फ़िल्मकारों की पसंदीदा लोकेशंस में एक है, लेकिन कबीर ने कश्मीर का ऐसा नज़ारा दिखाया है, जो पहले कभी नहीं देखा गया. सलमान ने अपने किरदार से न्याय की पूरी कोशिश की है और काफ़ी हद तक कामयाब भी रहे.

कहानी:

कहानी है पाकिस्तान की सईदा (हर्षाली मल्होत्रा) की, जो जन्म से गूंगी है. सईदा के अब्बा-अम्मी को पता चलता है कि यदि उसे दिल्ली में बाबा निजामुदीन औलिया पर ले जाकर सजदा करेंगे, तो उसकी ज़बान वापस आ सकती है. अब दिल्ली आने के लिए सईदा के अब्बा को वीज़ा नहीं मिलता है,क्योंकि वो पाकिस्तान आर्मी में थे. लिहाज़ा सईदा को उसकी अम्मी दिल्ली लेकर आती हैं. दरगाह पर सदा करने के बाद दोनों वापस पाकिस्तान लौटने के लिए ट्रेन में बैठ जाती हैं. रात में एक सुनसान जगह पर ट्रेन रुकती है और सईदा ट्रेन से नीचे उतर जाती है. सईदा भारत में ही रह जाती है और उसकी अम्मी पाकिस्तान पहुंच जाती है. बेटी को खोजने के लिए सईदा की अम्मी वापस आना चाहती है, लेकिन भारत-पाक तनाव के कारण वो आ नहीं पाती.

वहीं सईदा ट्रेन से उतरने के बाद मालगाड़ी से कुरुक्षेत्र पहुंचती है. यहीं पर उसकी मुलाक़ात पवन चर्तुवेदी उर्फ़ बजरंगी (सलमान खान) से होती है. बजरंगी इस गूंगी बच्ची के मिलने पर उसे लोकल पुलिस स्टेशन लेकर जाता है, लेकिन पुलिस बच्ची को अपने साथ ले जाने की हिदायत देकर वापस भेज देती है.

पवन चर्तुवेदी बजरंग बली का भक्त है. वो  दिल्ली में अपने पिता के दोस्त त्रिपाठी जी (शरत सक्सेना) के घर रहता है. त्रिपाठी जी की बेटी रसिका (करीना कपूर खान) दिल्ली के एक स्कूल में टीचर है और बजरंगी से प्यार करती है. बजरंगी दिल्ली आकर रसिका और उसके परिवार को बच्ची के बारे में झूठ कहता है कि वो हिंदू है. अब बजरंगी उस बच्ची को उसके घर पहुंचाने के मिशन पर लग जाता है. कहानी में मोड़ तक आता है, जब पता चलता है कि लड़की पाकिस्तानी है.  वीजा नहीं मिलने की वजह से बजंरगी बच्ची को बिना पासर्पोट वीजा पाकिस्तान पहुंचाने का फैसला करता है. बॉर्डर पार करने के बाद बजरंगी पकड़ा जाता है.  एक लोकल टीवी चैनल के खोजी पत्रकार चांद नवाज़ ( नवाजुद्दीन सिद्दीकी) की मदद से बजरंगी पाकिस्तानी पुलिस से छुपता छुपाता बच्ची को उसके घर पहुंचाने के अपने मिशन में लग जाता है.

अभिनय :

 बजरंगी के किरदार में सलमान ने जान डाल दी है. वहीं रसिका के किरदार में करीना के करने के लिए कुछ ख़ास   नहीं था. पत्रकार के किरदार को नवाज़ ने बखूबी निभाया है. कई सीन्स में तो नवाज़, सलमान पर भी भारी पड़े हैं. बेहद छोटी भूमिका के बावजूद ओमपुरी ने अपनी छाप छोड़ी. लेकिन इन सबसे ज्यादा तारीफ़ करनी होगी छोटी हर्षाली की. हर्षाली ने गूंगी सईदा के किरदार को जीवंत कर दिया.

निर्देशन: 

फिल्म का फर्स्ट हाफ़ कुछ धीमा रहा, ख़ासतौर पर फ़्लैशबेक के सीस फिजुल लगे. लेकिन इंटरवल के बाद कबीर ख़ान ने कहानी और किरदारों को अच्छी तरह गूंथा है. लोकेशन सिलेक्शन के लिए कबीर की तरीफ़ होनी चाहिए. और सलमान के फ़ैन्स को ईद पर तोहफ़ा देने के लिए कई सीन्स डाले गए हैं.

संगीत: 

प्रीतम चक्रवर्ती ने संगीत का जादू चलाया है. फ़िल्म रिलीज़ से पहले गाने हिट थे.