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फिल्म समीक्षा: किस किस को प्यार करूं

यदि आप कपिल की कॉमेडी के दीवाने हैं, तो उनके पंचेस देखने ज़रूर जाएं। एक बार तो इस फ़िल्म को झेला ही जा सकता है। यदि आप कॉमडी नाइट्स विद कपिल बड़े परदे पर देखना चाहते हैं, तो भी जाएं। अब तो शाहरुख ख़ान ने भी ट्वीट करके फ़िल्म की तारीफ़ कर दी है। हॉं पर ये याद रखें कि अगर आप कॉमेडी में भी सेंस रखते हैं, तो न जाना ही बेहतर होगा।

अब्बास मस्तान की फ़िल्म 'किस किस को प्यार करूं' कॉमेडियन कपिल के रॉकेट पर सवार हैं, जो कि फुस्स सा ही है।
कलाकार -  कपिल शर्मा, एली अवराम, वरुण शर्मा, अरबाज ख़ान, मंजरी फडनीस, सईं लोकुर,                                          सुमिरन कौर मुंडी, शरत सक्सेना, सुप्रिया पाठक, मनोज जोशी
निर्देशक-    अब्बास-मस्तान
जोनर -       कॉमेडी
संगीत -       जावेद मोशिन, अमजद, नदीम

सस्पेंस और थ्रिलर फ़िल्मों के महारथी अब्बास मस्तान की फ़िल्म 'किस किस को प्यार करूं' कॉमेडी फ़िल्म है। यह इस जोड़ी की कॉमेडी के जोनर में तीसरी कोशिश है। 

इससे पहले वे शाहरुख ख़ान के साथ 'बादशाह' और शाहिद कपूर व करीना कपूर के संग '36 चाइना टाउन 'का भी निर्माण कर चुके हैं। हालांकि, पिछली दो कोशिशों में इस जोड़ी के हाथों निराशा ही लगी थी। 

लेकिन इस बार भी वो जो छोटे पर्दे के पॉपुलर कॉमेडियन कपिल के रॉकेट पर सवार हैं, वो फुस्स सा ही है।

'किस किस को प्यार करूं' को देखते वक़्त लगा जैसे 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' का कोई एपीसोड बड़े परदे पर चल रहा हो। ज़बरदस्ती खींचतान करके फ़िल्म बनाने की कोशिश की गई। 

हालांकि कुछ सीन्स अच्छे बन पड़े हैं। लेकिन कई सीक्वेंस बेवकुफ़ाना भी लगते हैं। एक तो कहानी नहीं, ऊपर से किरदारों की भरमार। किसी भी कलाकार को अपने किरदार को निभाने का सही मौक़ा नहीं मिला। 

बावजूद इसके कलाकरों ने ठीक ठाक काम कर ही दिया है। फ़िल्म की पटकथा और डॉयलाग्स ठीक रहे। ख़ासतौर पर डॉयलाग्स के लिए अनुकल्प गोस्वामी और धीरज सरना की तारीफ़ करनी होगी। एक प्रीडिक्टिबल फ़िल्म को रोचक बनाया।

फ़िल्म में कपिल कहीं भी नायक के पैरामीटर में फिट होते नहीं नज़र आते। उनकी परफ़ारमेंस देखते हुए लगता है, जैसे वो स्टेंडअप कॉमेडी ही कर रहे हैं। कुछ सीन्स जहां वे अपनी अभिनय क्षमता को दिखा सकते थे, वे वहां काफ़ी कमज़ोर नज़र आए। 

वहीं डायलॉग डिलीवरी और कॉमेडी पंचेस मारने में उनका कोई जवाब नहीं है। वे कॉमेडियन की भूमिका में बेहतरीन बैठते हैं। लेकिन उनके बूते फ़िल्म चला पाना तक़रीबन नामुमकिन सा ही है। थिएटर में डायलॉग्स और कपिल की टाइमिंग ही रही, जो सीट पर दर्शकों को बांधे रही।

अब बात करते हैं बाक़ी कलाकारों की। सबसे पहले एली अवराम का नाम आता है। वे फ़िल्म में जितनी देर भी रही बेहतरीन रहीं। बॉलीवुड में विदेश से आए कलाकारों की तुलना में उनकी हिंदी और डायलॉग्स काफ़ी प्रभावित करते हैं।

वहीं बाक़ी तीनों अभिनेत्रियों मंजरी फडनीस, सईं लोकुर, सिमरन कौर मुंडी ने भी अच्छा काम किया है। वहीं बहरे डॉन की भूमिका में अरबाज ख़ान ने भी प्रभावित किया। हीरो के दोस्त और वकील की भूमिका में वरुण शर्मा भी अच्छे रहे।

संगीत

अब बात करें संगीत की तो वो बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। 'बम बम' के अलावा बाक़ी गाने कान फोडू रहे।

कहानी

यह कहानी है शिव राम किशन कुमार (कपिल शर्मा) की, जिसकी एक के बाद एक हादसे में तीन शादियां हो जाती हैं। तीनों शादियों को एक साल से संभाल ही रहा होता है कि अचानक उसका पहला प्यार दीपिका (एली अवराम) विदेश से लौट आती है। 

अभी तक शिव राम किशन कुमार ने अपनी तीनों बीवियों यानी अंजली (सईं), जूही (मंजरी फडनीस) और सिमरन (सिमरन कौर मुंडी) को एक दूसरे से मिलने से रोके रखा था, लेकिन एक दिन तीनों की जॉगिंग के दौरान दोस्ती होती है और वे पक्की सहेलियां बन जाती हैं। 

वहीं सिमरन और दीपिका भी पुरानी सहेलियां निकलती हैं। हर रोज़ पकड़े जाने का डर और ग़लफ़हमियों और बेसिर पैर के झूठ का ताना बाना बनता चला जाता है। आख़िर में जब इसका भंडाफोड़ होता है, तो क्या कुछ होता है। यह तो इसे झेलने वाला ही जाने।

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आगे कुछ याद आया 'प्रेम रतन धन पायो' के पोस्टर से