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कविता कृष्णमूर्ति डरती थीं गाने से

अरे, नहीं! वो गाने से नहीं डरती थीं। बल्कि इन्हें सबके सामने यानी स्टेज पर गाने से डर लगता था, वह भी अपने करियर की शुरुआती दिनों में। शहद सी मीठी आवाज़ की मल्लिका कविता कृष्णमूर्ति आज अपने 58 वें बसंत में प्रवेश कर रही हैं। इन दिनों कई नईं आवाज़ें संगीत की दुनिया में गूंज रही हैं, लेकिन कविता का वो सुरीला दौर आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। आठ साल की उम्र में गायिकी के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली कविता पद्मश्री से भी सम्मानित हैं। आइए, उनके जन्मदिन पर उनके संगीत के सफर पर नजर डालते हैं।

पद्मश्री से सम्मानित गायिका कविता कृष्णमूर्ति
मुंबई। मेलोडी क्वीन कविता कृष्णमूर्ति के खाते में न जाने कितने ही खूबसूरत गाने दर्ज़ हैं। इनका जन्म दिल्ली में 25 जनवरी 1958 को अय्यर परिवार में हुआ था। जन्म के समय इनका नाम शारदा कृष्णमूर्ति था।

इनके पिता शिक्षा विभाग में अधिकारी थे और घर में पढ़ाई पर काफ़ी जोर दिया जाता था। लेकिन छोटी कविता को संगीत में विशेष रूचि थी। आलम यह था कि बचपन में रेडियो के पास ही बैठ जाया करती थीं और बड़े गौर से गाने सुना करती थीं। 

वह रेडियो पर लता मंगेशकर और मन्ना डे के गाए गीत खूब गौर से सुनतीं और साथ-साथ गुनगुनाती थीं। उनकी इस दिलचस्पी को देखते हुए, उनको संगीत की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही शुरू कर दी गई। इसके बाद उन्होंने गुरु बलराम पुरी से शास्त्रीय संगीत सीखा।

जब वे आठ साल ही हुईं, तो संगीत प्रतियोगिता में भाग लिया। इस प्रतियोगिता में उन्होंने अपनी गायिकी का जौहर दिखाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद तो उन्होंने प्लेबैक सिंगर बनने का सपना बुनना शुरू कर दिया।


सौम्य कविता कॉलेज में थीं चंचल

मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से उन्होंने स्नातक की डिग्री प्राप्त की और यहीं काम की तलाश में जुट गईं। सौम्य सी कविता अपने कॉलेज के समय में काफी चंचल हुआ करती थी। वो हर प्रतियोगिता में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया करती थीं। 

इसी दौरान उनकी मुलाकात उस दौरान 'बिनाका गीतमाला' के प्रस्तोता अमीन सयानी से हुई। इसके बाद तो अमीन के साथ वो उनके कार्यक्रमों में जाने लगीं। मौक़ा मिलते ही कविता ने कई भाषाओं में गाने गाए।


डरती थी सबके सामने गाने से

शुरू में कविता को सबके सामने गाने से बहुत डर लगता था। बाद में धीरे-धीरे उनका डर कम होता गया। उसी दौरान साल 1971 में हेमंत कुमार ने उन्हें बुलाया और बांग्ला में रवींद्र संगीत की तीन-चार लाइनें सिखाकर कहा, "इंतजार करो लता जी आ रही हैं उनके साथ गाना है।" इसके बाद वह लता जी को गाता देख सहज महसूस करने लगीं और उनके साथ गीत गाया।


मुश्किल था सिंगर बनना

90 के दशक में पार्श्वगायकिा रूप में उभरीं कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी सुरीली आवाज़ से सबको अपना दीवाना बना दिया था, लेकिन उनके लिए गार्श्वगायिका बनने का अपना सपना पूरा करना बड़ा ही मुश्किल रहा। 

दरअसल, कविता के परिवार में सभी सरकारी नौकरी पर ज़ोर दिया करते थे, लेकिन कविता ने तो अपना निर्णय ले लिया था। इसके बाद अपने पिता जी को काफी मान मनौव्वल किया। थोड़ी ना नुकुर के बाद कविता को मुंबई आने की अनुमति मिल गई।


फिल्म से हटाया गाना

कहते हैं न, जब तक असफलता का स्वाद न चखा जाए, सफलता का आनंद नहीं उठा सकते। कविता के लिए भी हिन्दी सिने जगत में पार्श्वगायिका बनने का सफर उबड़ खाबड़ ही रहा। सबसे पहले उन्हें साल 1980 में फिलम 'मांग भरो सजना' का गाना 'काहे को ब्याही' गाने का मौक़ा मिला। 

बतौर पार्श्वगायिका अपने पहले मौक़े से वो बहुत खुश थीं, लेकिन फिल्म रिलीज होने पर पता चला कि वो गाना तो फिल्म से काट दिया गया है। दुख तो कविता को हुआ, लेकिन खुद पर उन्हें भरोसा था। वैसे भी प्रतिभा कभी छिपती नहीं।

इसके बाद साल 1985 में फिल्म 'प्यार झुकता नहीं' के गानों ने उन्हें बतौर पार्श्वगायिका के रूप में पहचान दिला दी। उन्हें चार बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका का फिल्मफेयर अवार्ड मिला है। साल 1995 में '1942 ए लव स्टोरी' के लिए, 1996 में 'याराना' के लिए, 1997 में 'खामोशी' और साल 2003 में 'देवदास' के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया। यही नहीं, 2005 में उन्हें देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान, पद्मश्री मिला।

कविता कृष्णमूर्ति आज भी पूरी तरह सक्रिय हैं और नई अभिनेत्रियों के लिए गाने को इच्छुक हैं। उन्होंने अपने करियर में आनंद मिलन, उदित नारायण, ए.आर. रहमान, अनु मलिक जैसे गायकों और संगीत निर्देशकों के साथ काम किया है। 

उन्होंने कई भक्ति गीत भी गाए हैं.अभिनेत्रियों में श्रीदेवी, रानी मुखर्जी, काजोल और प्रीति जिंटा पसंद हैं। शबाना आजमी को वह बेहतरीन अभिनेत्री मानती हैं। कविता ने शबाना आजमी, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, मनीषा कोइराला और एश्वर्या राय सरीखी शीर्ष की अभिनेत्रियों के लिए कई गाने गाए हैं।


सपनों के राजकुमार से शादी


कविता कृष्णमूर्ति अपने पति और वायलिन वादक एल सुब्रमण्यम के साथ

कविता ने शादी भी अपने सपनों के राजकुमार से की। जैसा कि आप सब जानते हैं कि कविता वायलिन वादक एल। सुब्रमण्यम की पत्नी हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह बात जानते होंगे कि कविता शुरू से ही सुब्रमण्यम से शादी का सपना देखा करती थीं। लेकिन वो शादीशुदा थे, तो कभी पहल नहीं की। 

कविता ने एक साक्षात्कार में कहा कि एक बार उन्हें गायक हरिहरन के साथ मिलकर सुब्रमण्यम के लिए गाना गाना था, तब उनकी शादी नहीं हुई थी। सुब्रमण्यम का बहुत नाम था और इसलिए कविता उनसे बहुत घबराई हुई थीं, लेकिन उन्होंने बहुत धैर्य के साथ गाना पूरा किया। 

सुब्रमण्यम पहले से शादीशुदा थे, हालांकि उनकी पत्नी का देहांत हो चुका था। वैसे तो मन ही मन कविता उन्हें अपना दिल दे चुकी थीं, लेकिन उन्होंने कभी पहल नहीं की। कुछ समय बाद सुब्रमण्यम ने शादी के लिए प्रस्ताव रखा तो कविता ने झट से 'हां' कह दिया और दोनों विवाह बंधन में बंध गए।

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