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सेंसर बोर्ड को 'बैंक चोर' लगती है 'गाली' की तरह

अब सेंसर बोर्ड ने रितेश देशमुख और विवेक ओबेरॉय की फिल्म ‘बैंक चोर’ को लेकर आपत्ति जताई है। बोर्ड ने फिल्म का नाम बदलने के साथ फिल्म में इस्तेमाल हुए शब्द ‘बैंक चोर’ का डब करने की ताकीद भी दे डाली है। हालांकि, कुछ दिनों पहले ही ख़बर आई थी कि फिल्म को यूए सर्टिफिकेट दिया जा चुका है। 

सेंसर बोर्ड को फिल्म बैंक चोर गाली की तरह लगती है
मुंबई। यशराज बैनर के यूथ प्रोडक्शन हाउस वाई फिल्म्स की फिल्म ‘बैंक चोर’ को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने आपत्ति जताई है। एक अंग्रेज़ी पोर्टल में छपी ख़बर की मानें, तो सेंसर को फिल्म ‘बैंक चोर’ का ‘गाली’ की तरह लग रहा है। मेकर्स को सेंसर ने ‘बैंक चोर’ को डब करने की हिदायत दी है।

हालांकि कुछ दिन पहले ही ख़बर आई थी कि रितेश देशमुख और विवेक ओबरॉय अभिनीत इस फिल्म को सेंसर ने यूए सर्टिफिकेट दिया है। 

अब सेंसर बोर्ड का कहना है कि ये ‘अपशब्द’ लग रहा है और वो इसे पास नहीं कर सकते। वहीं बोर्ड से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि फिल्म के मेकर्स को लगा कि फिल्म में जैसे ही ये शब्द आएगा लोग जोर-जोर से हसेंगे, लेकिन ऐसा नहीं होगा। उन्होंने चालाकी से ऐसा टाइटल रखा जो अपशब्द जैसा सुनाई दें। फिल्म के ट्रेलर से भी इस शब्द को हटाने के लिए कहा गया है। 

वाई फिल्म्स की मानें, तो 'बैंक चोर' तीन चोरों की कहानी है, जो बैंक में डाका डालने के लिए सबसे खराब दिन को चुनते हैं। तीनों चोर, चंपक, गेंदा और गुलाब बेवकूफ दिखाए गए हैं और इसमें एडल्ट कॉमेडी नहीं है। फिल्म की टीम चाहती थी कि ये पारिवारिक दर्शकों के हिसाब से बनाई जाए।

वहीं फिल्म को लेकर रितेश ने बताया था कि फिल्म बनाते समय हमारे दिमाग़ में पारिवारिक दर्शक ही चल रहे थे और हम बहुत खुश हैं कि इसे अच्छी रेटिंग मिली है। ये सभी उम्र के लोगों को पसंद आने वाली है। 

ग़ौरतलब है कि फिल्म का निर्माण यशराज बैनर का यूथ प्रोडक्शन हाउस वाई फिल्म्स कर रहा है। वाई फिल्म्स ने इससे पहले 'मैन्स वर्ल्ड', 'बैंग बाजा बारात', और 'लेडिज रूम' जैसे कई हिट वेब सीरीज बनाई हैं।

अब 16 जून को रिलीज़ हो रही इस फिल्म का आगे क्या होता है हाल, वो तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।

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