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फिल्म समीक्षा: हसीना पारकर

‘शूटआउट एट लोखंडवाला’, ‘एक अजनबी’, ‘जंजीर’ सरीखी फिल्में बनाने वाले निर्देशक अपूर्व लाखिया अब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर की ज़िंदगी पर आधारित फिल्म लेकर आए हैं। फिल्म में ‘हसीना पारकर’ का किरदार श्रद्धा कपूर ने निभाया है और उनके भाई सिद्धांत, दाऊद इब्राहिम की भूमिका में हैं। क्या कुछ ख़ास लेकर आए हैं अपूर्व, आइए करते हैं समीक्षा...

श्रद्धा कपूर फिल्म हसीना पारकर में
फिल्म : हसीना पारकर
निर्माता : स्विस एंटरटेनमेंट
निर्देशक : अपूर्व लाखिया
कलाकार : श्रद्धा कपूर, सिद्धांत कपूर, अंकुर भाटिया, राजेश तैलंग, दधि पांडेय
संगीतकार : सचिन-जिगर
जॉनर : बायोग्राफिकल क्राइम फिल्म
रेटिंग : 2/5


एक्शन से लबरेज फिल्में बनाने वाले अपूर्व लाखिया इस बार ‘गॉडमदर’ हसीना पारकर की कहानी दर्शकों को ले कर आए हैं। हसीना पारकर के किरदार के लिए पहले सोनाक्षी को लिया गया था, लेकिन ऐन मौके पर श्रद्धा कपूर को फिल्म बना डाली। क्या कुछ कमाल किया है उन्होंने, आइए देखते हैं। 

कहानी

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर की कहानी है। कहानी शुरू होती है साल 2007 से, जब हसीना पारकर (श्रद्धा कपूर) कोर्ट में पेशी के लिए आती है। पेशी के दौरान कोर्ट में महिला वकील हसीना से जिरह के दौरान उनके पिता (दधि पांडेय), पति (अंकुर भाटिया) और भाई (सिद्धांत कपूर) के बारे में सवाल पूछती है। इस तरह हसीना एक-एक कर जवाब देती जाती है और फिल्म की कहानी खुलती जाती है। इस दौरान बाबरी मस्जिद, हिंदू मुस्लिम दंगे, मुंबई ब्लास्ट जैसी कई घटनाओं का ज़िक्र होता है। आखिर में कोर्ट हसीना पर क्या फैसला सुनाता है, जानने के लिए थिएटर का रुख करना होगा। 

कहा जाता है कि दाऊद के दुबई भागने के बाद उसका बहनोई इब्राहिम पारकर मुंबई में उसका कारोबार संभालता था। उसकी हत्या के बाद हसीना ने कारोबार संभालना शुरू कर दिया और वो बन गई थी ‘गॉडमदर’। 

समीक्षा 

कमजोर कहानी और लचर स्क्रीनप्ले वाली इस फिल्म को अपूर्व लाखिया ने संभालने की काफी कोशिश की। उनका कैमरावर्क और निर्देशन काबिल-ए-तारीफ रहा। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, उसमें बनावटीपन साफ दिखने लग जाता है। वहीं डायलॉग कई बार इतने अजीब लगे कि गंभीर मौक़ों पर भी हंसी छूट जाए। 

सबसे पहले बात की जाए श्रद्धा कपूर की, वो इस हसीना के किरदार में कहीं भी फिट नहीं लगती है। वहीं सिद्धांत कपूर दाऊद इब्राहिम के किरदार के न्याय करते नज़र नहीं आए। जितने भी लोगों ने दाऊद के किरदार को पर्दे पर निभाया है, उनमें सबसे कमजोर सिद्धांत ही रहे हैं। 

हसीना के पिता के किरदार में दधि पांडेय ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दी। वहीं हसीना के पति के किरदार को अंकुर भाटिया अच्छी तरह निभाया। 

फिल्म का संगीत कुछ ख़ास नहीं रहा। वहीं बैकग्राउंड स्कोर काफी लाउड रहा।

ख़ास बात 

अपूर्व लाखिया और श्रद्धा कपूर के फैन हैं, तो ज़रूर जाइए, लेकिन मज़ेदार फिल्म देखने की उम्मीद से थिएटर न ही जाना अच्छा विकल्प होगा।

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