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बर्थ-डे स्पेशल : जब ‘गब्बर’ बना ब्रांड एंबेसडर

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री की कालजयी फिल्मों में शुमार फिल्म ‘शोले’ और उसका खलनायक ‘गब्बर’ एक दूसरे के पूरक हैं। जब भी एक का नाम लिया जाता है, तो दूसरे का ख़याल ज़ेहन में अपने आप ही उतर आता है। ‘गब्बर’ की भूमिका निभाने वाले अमजद खान ने यूं तो कई फिल्मों में नकारात्मक किरदार से लेकर कॉमेडी कैरेक्टर्स भी निभाए, लेकिन ‘गब्बर’ उनकी पहचान बन गई। वो शायद ऐसे पहले खलनायक रहे, जिनहें ब्रिटैनिया कंपनी में अपनी बिस्किट के विज्ञापन के लिए चुना। आलोचना भी हुई, तो नायकों से बेहतर होने के लिए। इस बेहतरीन कलाकार को उसके जन्मदिन पर याद करते हैं। 

अमजद खान फिल्म के एक सीन में
मुंबई। बॉलीवुड फिल्मों में आमतौर पर नायक और खलनायक के बीच भिड़ंत देखने को मिलती है और जब बात करें विलेन्स की, तो फिर ‘गब्बर’ ख़ुद-ब-ख़ुद ज़ेहन में आ जाता है। इस किरदार को पर्दे पर जीवंत किया था अभिनेता अमजद खान ने। हालांकि, अमजद इस किरदार के लिए पहली पसंद नहीं थे। बिलकुल, पहले इस किरदार को अभिनेता डैनी निभाने वाले थे, लेकिन किसी कारण से वो फिल्म के लिए अपनी डेट नहीं दे पाए। 

वहीं जब इस किरदार के लिए अमजद का नाम सुझाया गया, तो स्क्रिप्ट राइटर जोड़ी सलीम-जावेद ने यह कह कर नकार दिया कि अमजद की आवाज़ इस किरदार के लिए कमज़ोर है। फिर भी होनी को कुछ और ही मंज़ूर था और अमजद की छोली में ‘गब्बर’ का रोल आ गिरा। उसके बाद जो हुआ वो इतिहास बन गया। 

अमजद ज़कारिया खान को गुज़रे तक़रीबन 25 साल हो गए हैं और उनके द्वारा निभाया गया ‘गब्बर’ का किरदार और फिल्म ‘शोले’ सौ साल के भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में शुमार है। 

पचास-साठ के दशक के मशहूर विलेन जयंत के घर 12 नवंबर 1940 को एक बच्चे का जन्म हआ, जिसे नाम दिया गया अमजद खान। जी हां, कहा जा सकता है कि खलनायकी उनको विरासत में ही मिली है। अमजद की फिल्मोग्राफी के लिए यदि आप विकीपीडिया पर जाएंगे, तो पाएंगे कि उनकी पहली फिल्म ‘नाज़नीन’ थी, लेकिन यह सही नहीं है। दरअसल, अमजद ने अपने करियर की शुरुआत महज चार साल की उम्र में ही कर दिया था। अमजद ने बतौर बाल कलाकार अपने चाचा की फिल्म ‘चार पैसा’ में पहली बार कैमरा फेस किया था। अमजद खान फिलॉस्फी से पोस्ट ग्रेजुएट थे। 

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग छाप छोड़ने वाले अमजद करियर के शुरुआती दौर में नाकामयाबी से खूब दो-चार हुए। यहां तक कि जब फिल्म ‘शोले’ फ्लॉप हुई, तो इसका ठीकरा उनके सिर पर फोड़ते हुए कहा गया कि इस किरदार के लिए अमजद सही चुनाव नहीं थे। उनकी आवाज़ बेहद कमज़ोर थी। हालांकि, बाद में उनके ही डायलॉग हिट हुए और लोगों को सिनेमाघरों तक खींच कर ले आए। पहली बार किसी फिल्म के डायलॉग के ऑडियो कैसेट बाज़ार में उतारे गए थे। 

फिल्म ‘शोले’ के डाकू ‘गब्बर’ के किरदार के लिए पहले डैनी का नाम प्रस्तावित था, लेकिन वो पीछे हट गए थे। इस फिल्म और किरदार के बारे में बात करते हुए डैनी ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘यदि मैंने शोले की होती, तो भारतीय सिनेमा अमजद जैसे अद्भुत कलाकार को खो देता’। 

वहीं इस किरदार के लिए अमजद ने भी कम मेहनत नहीं की थी। ‘शोले’ में पहनी गई खाकी वर्दी वो ख़ुद चोर बाज़ार से ख़रीद कर लाए थे। लगातार असफलता का स्वाद चख रहे अमजद ने ‘गब्बर’ को पर्दे पर कुछ इस तरह से निभाया कि ‘शोले’ और ‘गब्बर’ एक-दूसरे के पर्याय बन गए। 

पहला विलेन जो बना ब्रांड एंबेसडर

जो लोकप्रियता एक सफल फिल्म के नायक को मिलती है, वैसी ही प्रसिद्धी फिल्म ‘शोले’ के खलनायक को मिली। इसलिए तो तो ब्रिटैनिया ने अमजद को अपने ग्लूकोज़ बिस्किट के विज्ञापन के लिए चुना। यह विज्ञापन ‘गब्बर की असली पसंद’ की पंचलाइन के साथ लोकप्रिय हुआ था। ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी कंपनी ने अपने प्रोडक्ट के प्रचार के लिए किसी विलेन को चुना था।

अमजद को डांटा डेब्यू डायरेक्टर ने

अमजद खान समय के काफी पाबंद थे। यही कोई 1980 के दशक की बात है। उनकी फिल्म ‘शोले’ सुपरहिट करार दे दी गई थी। इसी दौरान उन्होंने एक मल्टीस्टारर फिल्म साइन की। बड़े प्रोड्यूसर की इस फिल्म में उस वक़्त के दिग्गज कलाकार थे, लेकिन डायरेक्टर की यह पहली फिल्म थी। लिहाजा सभी कलाकार अपनी सुविधा के अनुसार आने लगे। घंटो लेट सेट पर आया करते थे। उसके बाद तुर्रा ये कि ख़ुद ही अपने डायलॉग भी लिखेंगे, सीन भी ख़ुद ही गढ़ेंगे। एक दिन बेचारे डायरेक्टर के सब्र का बंध टूट गया और वो रोने लगा। 

जब अमजद खान ने उस डायरेक्टर को रोते देखा, तो पूरा माजरा पूछा। अमजद का पूछना था कि डायरेक्टर उबल पड़ा। उसने सारी बात बताई और कहा कि अब नहीं करनी उसको फिल्म। सारा वाकया जानने के बाद अमजद ने एक फॉर्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि अगले दिन वे सबसे लेट आएंगे और जैसे ही वे सेट पर पहुंचें, वह उन्हें लेट होने के लिए सबके सामने, बिना हिचके ऊंची आवाज में डांट लगाए। इसके बाद अमजद माफी भी मांगेंगे। 

योजना के मुताबिक सारा काम किया गया। फिर क्या था, इसके बाद कोई भी कलाकार सेट पर लेट नहीं हुआ और न ही स्क्रिप्ट में कोई बदलाव नहीं किया गया। बाद में वो फिल्म सुपरहिट भी हुई। 

अमजद खान की लव-स्टोरी

अमजद खान की लव स्टोरी भी कम दिलचस्प नहीं है। दरअसल, एक बार अमजद शेहला के पास गए और बोले क्या तुम जानती हो तुम्हारे नाम का मतलब क्या है..शेहला ने कहा नहीं। उन्होंने कहा इसका मतलब होता है, जिसकी डार्क आंखें हों। बाद में अमजद ने उनसे पूछा... तुम्हारी उम्र क्या है तो शेहला ने कहा 14 साल। यह सुनकर अमजद ने कहा जल्दी बड़ी हो जाओ, मुझे तुमसे शादी करनी है। यही नहीं जब शेहला 11वीं क्लास में थीं, तब अमजद की मां उनके घर शादी का प्रपोजल लेकर गई थी। आखिरकार अमजद की मुराद पूरी हो गई और साल साल 1972 में शेहला खान से उनका निकाह हो गया। इसके बाद शेहला और अमजद तीन बच्चों के माता-पिता बने। 

अमजद खान रोचक जानकारियां

  • अमजद खान के दो भाई हैं, इम्तियाज़ और इनायत खान। वो भी अभिनेता है। इनायत ने एक फिल्म की है, जबकि इम्तियाज़ कई फिल्मों में नज़र आ चुके हैं। 
  • अमजद खान ने अपने पिता के साथ भी फिल्में की हैं। हालांकि, उनकी फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाओं में ही दिखे हैं। 
  • साल 1971 में अमजद खान ने निर्देशक के आसिफ को फिल्म ‘लव एंड गॉड’ में असिस्ट किया था, लेकिन फिल्म पूरी न हो सकी, क्योंकि निर्देशक की मौत हो गयी थी। बाद में इस फिल्म को उन्होंने पूरा किया और साल 1985 में रिलीज की। 
  • साल 1973 में आई फिल्म ‘हिन्दूस्तान की कसम’ से डेब्यू किया था। 
  • अमजद खान को चाय की लत थी। वे एक दिन में करीब 30-50 कप चाय पी जाते थे। किसी भी फिल्म के सेट पर प्रोडक्शन हाउस को इलाइची वाली चाय का इंतेजाम करना पड़ता था। इसे लेकर मशहूर किस्सा भी है। दरअसल, पृथ्वी थिएटर की कैंटीन के कर्मचारी अमजद की चाय की मांग पूरी नहीं कर पाते थे, क्योंकि उनको दूध लेने दूर जाना पड़ता था। इस समस्या का हल भी ख़ुद अमजद ने ही निकाला। उन्होंने दो भैंसे ख़रीद कर थिएटर में बंधवा दी, ताकि स्टाफ को दूध लेने दूर न जाना पड़े। 
  • साल 1992 में सिर्फ 52 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई में आखिरी सांस ली। उनकी मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई थी। 
  • अपने 30 साल के फिल्मी करियर में अमजद खान ने करीब 300 फिल्मों में काम किया, जिसमें ज्यादातर अमिताभ बच्चन के साथ थीं। 
  • अमजद ने ‘चोर सिपाही’ और ‘अमीर गरीब आदमी’ नाम की दो फिल्मों का निर्देशन भी किया, लेकिन फिल्में कुछ ख़ास कमाल न कर पाईं। 
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