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फिल्म समीक्षा : बियॉन्ड द क्लाउड्स

इस सप्ताह शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर की डेब्यू फिल्म रिलीज़ हुई है। ईरानी मूल के फिल्म निर्देशक माजिद मजिदी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बियॉन्ड द क्लाउड’ से ईशान अपना फिल्मी करियर शुरू कर रहे हैं। फिल्म में ईशान के अलावा मालविका मोहनन और तनिष्ठा चटर्जी अहम भूमिका में हैं। आइए करते हैं फिल्म की समीक्षा। बियॉन्ड द क्लाउड्स

फिल्म : बियॉन्ड द क्लाउड्स
निर्माता : शरीन मंत्री केडिया, किशोर अरोड़ा

निर्देशक : माजिद मजिदी
कलाकार : ईशान खट्टर, मालविका मोहनन, तनिष्ठा चटर्जी
संगीत : ए आर रहमान
जॉनर : फैमिली ड्रामा
रेटिंग : 2/5

विश्व के जाने माने फिल्मकार माजिद मजिदी की फिल्म ‘बियॉन्ड द क्लाउड’ इस शुक्रवार सिनेमाघरों में उतरी है। इस फिल्म से शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर अपना बॉलीवुड डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म को लेकर पहले से काफी चर्चा थी। फिर आइए देखते हैं, फिल्म में कितना दम है। 

कहानी

फिल्म की कहानी आमिर यानी ईशान खट्टर और उसकी बड़ी बहन तारा यानी मालविका की है। माता-पिता की मृत्यु के बाद आमिर बहन तारा के घर रहने लगा, लेकिन तारा का शराबी पति हर रोज तारा को साथ अक्सर आमिर को भी पीटता था। 

आए दिन होने वाले इस मारपीट से तंग आकर एक दिन आमिर घर छोड़ कर चला जाता है और फिर ड्रग्स पहुंचाने का काम करने लगता है। कई सालों के बाद एक दिन आमिर और तारा की मुलाक़ात होती, तब तक दोनों की ज़िंदगी में कई सारे बदलाव आ चुके होते हैं। 

जहां आमिर ड्रग्स सप्लाय के धंधे से पैसा बनाने में मशगूल था, वहीं उसकी बहन धोबी घाट पर काम करती थी। इसी धोबी घाट पर एक अधेड़ की उस पर बुरी नज़र थी। एक दिन मौका देखकर वो अधेड़ तारा से जबरदस्ती करने लगता है, तभी तारा उसे पत्थर से बुरी तरह पीटती है। इस जानलेवा हमले के लिए तारा को जेल हो जाती है। 

अब आमिर अपनी बहन तारा को बचाने की जिम्मेदारी लेता है। क्या आमिर अपनी जिम्मेदारी निभा पाएगा? तारा जेल से रिहा हो पाएगी? इन सबके जवाब के लिए फिल्म देखनी होगी। 

समीक्षा

माजिद माजिदी के निर्देशन में वो पहली फिल्मों की सी धार नज़र नहीं आती। हालांकि, रियल लोकेशन के नाम पर मुंबई की झुग्गियों को बखूबी चित्रित किया है, लेकिन बिना कहानी के फिल्म मज़ेदार नहीं बनती है। फिल्म की कहानी काफी कमज़ोर है। महौल के साथ डायलॉग मेल नहीं खाते। मुंबई की सड़कों पर बोली जाने वाली बोली, और इस फिल्म के किरदार जो बोलते हैं, वो बेमेल हैं।

अभिनय के फ्रंट की बात करें, तो ईशान ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। हालांकि, ईशान की पहली फिल्म ही है, लेकिन उन्होंने सधे हुए अभिनेता की तरह अभिनय किया है। यह कहने में गुरेज नहीं है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को ईशान के रूप में उम्दा अभिनेता मिला है। वहीं मालविका मोहनन कई जगह कमज़ोर नज़र आती है। वहीं गौतम घोष ओवरएक्टिंग करते दिखते हैं। तनिष्टा चटर्जी के लिए कुछ ख़ास बचा नहीं था। 

फिल्म का संगीत ए आर रहमान ने दिया है। फिल्म का संगीत बेअसर ही है। हालांकि, कुछ गाने कहानी को आगे बढ़ाते तो हैं, लेकिन दर्शकों की ज़बान पर चढ़ने असफल रहे। 

ख़ास बात 

यह वन टाइम वॉच मूवी है, लेकिन यदि माजिद मजिदी के जॉनर की फिल्म देखने को लेकर उत्साहित हैं, तो फिर इसे न ही देखने जाएं।

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