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‘मां’ के कई रूपों को परदे पर साकार करने वाली रीमा लागू

अभिनेत्री रीमा लागू की आज पहली पुण्यतिथि है। बीते साल 59 की उम्र में उनका निधन हो गया था। फिल्मों में ‘मां’ का किरदार निभाने वाली रीमा ने थिएटर से लेकर टेलीविज़न तक में सक्रिय भूमिका निभाई है। 

पहली पुण्यतिथि

मुंबई। बीते साल यानी साल 2017 की 18 मई को सशक्त अभिनेत्री रीमा लागू इस फानी दुनिया को अलविदा कह गईं। मात्र 59 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। आज उनकी पहली पुण्यतिथि है। 

यूं तो रीमा ने कई किरदार बखूबी निभाये हैं, लेकिन परदे पर उनके द्वारा निभाये गए ‘मां’ किरदार ने उनका अमिट छाप बनाई है। हालांकि, उन सरीखी कलाकार को एक किरदार में बांधना न्याय न होगा। रीमा न सिर्फ फिल्मों में बल्कि टेलीविज़न के साथ थिएटर में सक्रिय रही हैं। 

दिग्गजों के बीच उपस्थिति

साल 1980 के दौरान रीमा के हिस्से गोविंद निहलानी की ‘आक्रोश’ और श्याम बेनेगल की ‘कलयुग’ सरीखी फिल्में आईं। स्मिता पाटिल, नसीरुद्दीन शाह, अमरीश पुरी और ओम पुरी सरीखी दिग्गजों से सजी फिल्म ‘आक्रोश’ में रीमा ने एक लावणी डांस की भूमिका निभाई थी और छोटी सी भूमिका में ही वो अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहीं। 

इसके अलावा एक और मल्टीस्टारर फिल्म ‘कलयुग’ में वो नज़र आईं। शशि कपूर, रेखा और राज बब्बर अभिनीत इस फिल्म में भी रीमा नज़र आईं। हिंदी सिनेमा में छोटी-मोटी भूमिका करने वाली रीमा इससे पहले मराठी फिल्म ‘सिंहासन’ कर चुकी थीं और लगातार मराठी फिल्मों के साथ थिएटर में सक्रिय रहती थीं। 

इसके अलावा साल 1985 में शुरू हुआ टीवी धारावाहिक ‘खानदान’ में भी रीमा नज़र आईं। साल 1988 के आते-आते रीमा सिनेम, थिएटर और टेलीविज़न में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी थीं। सह-कलाकारों के साथ दर्शकों का भी रीमा का भरपूर प्यार मिला। 

फिर उनके जिम्मे आया एक ऐसा किरदार, जिसने उनको आलोचना का स्वाद चखाया। साल 1988 में ‘क़यामत से क़यामत तक’ और ‘रिहाई’ नाम की उनकी दो फिल्में आईं और दोनों में उन्होंने मां के किरदार को निभाया था। 

जहां ‘क़यामत से क़यामत तक’ में वो पारंपरिक मां की छवि को साकार करती दिखीं, तो वहीं ‘रिहाई’ में वो बंदिशे तोड़ने वाली मां के किरदार को निभा रही थीं। ‘क़यामत से क़यामत तक’ की मां को सराहा गया, तो ‘रिहाई’ वाली मां को दुत्कार मिली। 

दरअसल, ‘रिहाई’ में रीमा ने एक ऐसी मां के किरदार को साकार किया था, जिसका पति उसके पास नहीं रहता है और वो अन्य पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने में हिचकती नहीं है। 

जब मिला ‘मां’ का तमगा

फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिका निभाने के साथ अब वो मां के किरदार में नज़र आने लगी थीं, लेकिन सिल्वर स्क्रीन की ‘मां’ का तमगा मिलना बाकी था। यह तमगा उनको सूरज बड़जात्या की साल 1989 में आई फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ ने दिया। इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में रीमा ने सलमान खान की ‘मां’ का किरदार निभाया। 

फिर आई फिल्म ‘आशिकी’, ‘हिना’, ‘साजन’ सरीखी जिनमें रीमा ‘मां’ के किरदार में नज़र आईं। इसके बाद सूरज बड़जात्या की साल 1994 में आई सुपर-डुपर हिट फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में भी रीमा नज़र आईं। लेकिन इस बार वो सलमान की नहीं बल्कि माधुरी दीक्षित और रेणुका शहाणे की मां बनीं। इस फिल्म के लिए उनको फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का नॉमिनेशन भी मिला था। 

रीमा लागू ने सलमान खान, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, संजय दत्त, उर्मिला मातोड़कर, जूही चावला, अक्षय कुमार और काजोल सरीखे कलाकारों की मां की भूमिका परदे पर निभा चुकी हैं। 

कठोर-जिद्दी ‘मां’

रीमा लागू ने परदे पर कठोर और जिद्दी ‘मां’ की भूमिका को भी साकार किया है। साल 1992 में आई फिल्म ‘क़ैद में है बुलबुल’ में उम्होंने गुड्डो चौधरी के किरदार को निभाया था। भाग्यश्री अपने पति हिमालय साथ इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थीं। गुड्डो अपनी बेटी पूजा की शादी करने के खिलाफ थी। 

महेश मांझरेकर की साल 1999 में आई फिल्म ‘वास्तव’ में रीमा ने संजय दत्त की मां का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उन्होंने ‘मां’ कठोरतम रूप दिखाया। रीमा ऐसी मां की भूमिका में थीं, जो अपने अपराधी बेटे को गोली मार देती है। 

कमाल का कॉमिक सेंस

रीमा लागू के भीतर कमाल का कॉमिक सेंस था। परदे पर कभी संजीदा मां, तो कभी हंसती-खिलखिलाती मज़ाकिया मां के किरदार को जीवंत कर रही थीं। उसी दौरान वो टीवी की दुनिया में भी सक्रिय थीं। उनके मशहूर टीवी धारावाहिकों में ‘श्रीमान-श्रीमति’ और ‘तू तू मैं मैं’ खासे लोकप्रिय रहे हैं। 

इस बेहतरीन अदाकारा को सिर्फ ‘मां’ के किरदार में बांध कर रखना और देखना उसके साथ न्यान न होगा। एक सशक्त अभिनेत्री का यूं वक्त से पहले चले जाना सिनेमा जगत के लिए आघात ही रहा। फिर भी कहते हैं न, ‘शो मस्ट गो ऑन’।

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