रजनीकांत को मिलेगा 'दादा साहेब फाल्के' पुरस्कार

रजनीकांत को फिल्मी दुनिया के सबसे बड़े सम्मान 'दादा साहेब फाल्के' पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि रजनीकांत को फिल्म इंडस्ट्री के योगदान के लिए उन्हे यह सम्मान दिया जा रहा है। रजनीकांत का 51वां दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड 3 मई को दिया जाएगा।

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दक्षिण भारत के सुपरस्टार 'थलाइवा' रजनीकांत को फिल्मी दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड 2019 से नवाजा जाएगा। रजनीकांत को 51वां दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड 3 मई को दिया जाएगा।

वहीं जब इसे तमिलनाडु चुनाव से जोड़कर देखे जाने की सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि रजनीकांत का फिल्म इंडस्ट्री के योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है। इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, तमिलनाडु में 6 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रजनीकांत को सोशल मीडिया इस सम्मान को पाने पर बधाई दी। उन्होंने लिखा, 'कई पीढ़ियों में लोकप्रिय, जबरदस्‍त काम जो कम ही लोग कर पाते हैं, विविध भूमिकाएं और एक प्‍यारा व्यक्तित्व ...ऐसे हैं रजनीकांत जी। यह बेहद खुशी की बात है कि थलाइवा को दादा साहेब फाल्‍के पुरस्कार से सम्‍मानित किया गया है, उन्‍हें बधाई।'

रजनीकांत ने राजनीति में आने का फैसला लिया, लेकिन 26 दिन के बाद ही इसे छोड़ने का मन बना लिया। दरअसल, 70 वर्षीय रजनीकांत ने खराब सेहत के चलते राजनीति में प्रवेश न करने का फैसला लिया। बता दें कि 3 दिसंबर को रजनीकांत ने कहा था कि वो नई पार्टी बनाएंगे औरसाल 2021 का विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगे। 31 दिसंबर को नई पार्टी का ऐलान किया जाएगा, लेकिन फिर ऐसा हो ना सका और 26 दिन के अंदर ही उन्होंने राजनीति छोड़ दी।

दक्षिण भारत की फिल्म इंडस्ट्री पर राज करने वाले रजनीकांत का जन्म 12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरु के एक मराठी परिवार में हुआ। रजनीकांत का असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। जीजाबाई और रामोजी राव की चार संतानों में शिवाजी सबसे छोटे थे और उनकी स्कूलिंग बेंगलुरु में हुई। रजनीकांत चार साल के थे, तभी उनकी मां का निधन हो गया था। घर की माली हालत खराब होने की वजह से कम उम्र में ही उन्होंने कुली से लेकर बस कंडक्टर तक का काम किया। बस में टिकट काटने के अनोखे अंदाज की वजह से वो लोकप्रिय हुए और फिल्मों में एक्टिंग करने की सलाह दी गई। इसके बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और फिर उनका सिक्का चल निकला।

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