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फिल्म समीक्षा: बादशाहो

निर्देशक मिलन लुथरिया चार साल के ब्रेक के बाद एक्शन पैक फिल्म ‘बादशाहो’ से वापसी कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके पसंदीदा अभिनेता अजय देवगन के साथ इमरान हाशमी, इलियाना डिक्रूज़, विद्युत जामवाल, संजय मिश्रा और ईशा गुप्ता अहम किरदारों में हैं। साल 1975 की इमरजेंसी के बैकड्रॉप पर बुनी यह फिल्म कैसी है, आइए करते हैं फिल्म की समीक्षा...

अजय देवगन और इमरान हाशमी फिल्म बादशाहो के एक सीन में
फिल्म : बादशाहो
निर्माता : भूणष कुमार, किशन कुमार, मिलन लुथरिया
निर्देशक : मिलन लुथरिया
कलाकार : अजय देवगन, इमरान हाशमी, इलियाना डिक्रूज़, विद्युत जामवाल, संजय मिश्रा, ईशा गुप्ता 
संगीतकार : तनिष्क बागची, अंकित तिवारी
जॉनर : पीरियड एक्शन ड्रामा
रेटिंग : 3/5 

‘कच्चे धागे’, ‘चोरी-चोरी’ और ‘वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ के बाद एक अजय देवगन के साथ मिलन लुथरिया ने टीम बनाई है। इन दोनों की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर हिट रही है। इसलिए एक बार फिर ये ‘बादशाहो’ के रूप में नई सौगात लाए हैं। इस एक्शन पैक पीरियड ड्रामा में अजय के अलावा इमरान हाशमी, इलियाना डिक्रूज़, संजय मिश्रा, ईशा गुप्ता और विद्युत जामवाल हैं। 

कहानी

फिल्म की कहानी साल 1975 में लगी इमरजेंसी के दौरान की है। इमरजेंसी के दौरान कई राजा-रजवाड़ों के खजानों को सरकार जप्त कर रही थी। उन रजवाड़ों में से एक महारानी गीतांजलि देवी भी हैं। गीतांजली के किरदार में इलियाना डिक्रूज़ हैं। 

अब खजाने को जप्त करने के लिए गीतांजलि देवी के महल पर भी छापा पड़ता है और सरकार उस खजाने को जप्त कर देती है। इसके बाद उस खजाने को ट्रक में भरकर दिल्ली भेजने का काम शुरू हो जाता है। उस खजाने को दिल्ली ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी सहर यानी विद्युत जामवाल को सौंपी जाती है। 

वहीं दूसरी तरफ अपने खजाने के बारे में गीतांजलि अपने नज़दीकी भवानी सिंह यानी अजय देवगन को बताती हैं। अब महारानी के इस खजाने को भवानी लूटने की योजना बनाता है और संजना यानी ईशा गुप्ता, दलिया यानी इमरान हाशमी, तिकला यानी संजय मिश्रा के साथ मिलकर खजाने को लूटने की कोशिश करता है। 

इस पूरे कारनामे को अंजाम देने के दौरान कई राज़ सामने आते हैं। कई भावों के उतार चढाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में बड़ी बात यह है कि क्या भवानी सिंह अपने काम में सफल हो पाता है या फिर वो खजाने को लूटने का खयाल ही छोड़ देता है। इसके लिए फिल्म देखनी होगी। 

निर्देशन/ पटकथा 

फिल्म की कहानी की बात करें, तो यह अच्छी कहानी थी और इसे बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता था। किस्सागोई प्रभावी नहीं है। कुछ सीन्स को बेजा ही खींचा गया है। लोकेशन का इस्तेमाल ठीक हुआ है, लेकिन बेहतर की गुंजाइश बाकी रह गई है। कई बार फिल्म की रफ्तार इतनी धीमी रही कि ऊब सी होने लगी। पटकथा को थोड़ा चुस्त किया जा सकता था। वहीं कुछ किरदारों में डिटेलिंग की कमी खली। एडिटिंग टेबल पर इस फिल्म को कुछ कुतरा जा सकता था। 

अभिनय

अभिनय की बात की जाए, तो सबसे पहले जिक्र आता है अजय देवगन का। अजय ने अपनी आंखों से जबरदस्त अभिव्यक्ति की है। वहीं इमरान हाशमी हटके किरदार में काफी फबे। संजय मिश्रा की अदायगी तो कमाल रही है। साथ ही ईशा गुप्ता, इलियाना डिक्रूज़ और विद्युत जामवाल ने उम्मीद मुताबिक अच्छा काम किया है। 

संगीत

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा था। साथ ही सनी लियोनी का डांस नंबर भी ठीक रहा। वहीं ‘रश्क़े ए कमर’ तो पहले से ही चार्ट बस्टर साबित हो चुका है। इसके अलावा बाकी गाने कुछ ख़ास अच्छे नहीं रहे। 

ख़ास बात 

अजय देवगन की एक्शन से लबरेज फिल्म का इंतज़ार है, तो फिर आप ज़रूर जाएं। अजय के अलावा आपको इमरान, ईशा और इलियाना भी लुभाएंगे। वन लाइनर्स यानी डायलॉग वाली फिल्में पसंद है, तो भी ज़रूर जाइए।


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