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फिल्म समीक्षा: तुम्हारी सुलु

विद्या बालन अभिनीत ‘तुम्हारी सुलु’ सिनेमाघरों में उतर आई है। ‘बेग़मजान’ के बाद साल 2017 में विद्या बालन की यह दूसरी फिल्म है। इस फिल्म को सुरेश त्रिवेणी ने निर्देशित किया है, तो फिल्म में विद्या के अलावा नेहा धुपिया, मानव कौल और आरजे मलिश्का अहम भूमिकाओं में हैं। फिर आइए करते हैं समीक्षा फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’की...

तुम्हारी सुलु में विद्या बालन
फिल्म : तुम्हारी सुलु
निर्माता : भूषण कुमार, तनुज गर्ग, अतुल कास्बेकर, शांति श्रवण मैनी
निर्देशक : सुरेश त्रिवेणी
कलाकार : विद्या बालन, मानव कौल, नेहा धूपिया और आरजे मलिश्का
संगीत : गुरु रंधावा, रजत नागपाल और तनिष्क बागची
जॉनर : कॉमेडी ड्रामा
रेटिंग : 3/5

बीते कुछ सालों से हिंदी सिनेमा की कहानियां बड़ी बारीकी से मध्यमवर्गीय परिवारों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में प्रवेश करने लगी हैं। इस नब्ज़ को नए फिल्मकारों ने बखूबी पकड़ा है और दर्शकों की भी दिलचस्पी इस तरह की कहानियों को लेकर बढ़ रही है। ऐसी ही एक कहानी लेकर आए हैं सुरेश त्रिवेणी। ‘तुम्हारी सुलु’ भी ऐसे ही एक वर्किंग कपल्स की प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ़ से उपजी है। आइए करते हैं फिल्म की समीक्षा....

कहानी

‘तुम्हारी सुलु’ एक मध्यम वर्गीय महिला सुलोचना दुबे उर्फ़ सुलु (विद्या बालन) की कहानी है, जो अपने पति अशोक दुबे (मानव कौल) और बेटे प्रणव के साथ मुंबई के विरार में रहती है। सुलु हर तरह की प्रतियोगिता में हिस्सा लेती है, फिर चाहे चम्मच पर रखे नींबू को मुंह में दबाकर दौड़ने की रेस हो या फिर रेडियो को कोई कॉन्टेस्ट हो। 

इन प्रतियोगिताओं में जीतने के बाद उसे पुरस्कार भी मिलते हैं। ऐसे ही एक प्रतियोगिता में जीतने के बाद वो पुरस्कार लेने जब रेडियो स्टेशन पहुंचती है, तो देखती है कि वहां पर रेडियो जॉकी यानी आरजे के लिए ऑडिशन दिए जा रहे हैं। तभी सुलु के मन में भी आरजे बनने की ख्वाहिश उठती है और वो भी ऑडिशन दे आती है। रेडियो की ओर से उसे लेट नाइट शो ‘तुम्हारी सुलु’ दिया जाता है। 

अब एक तरफ जहां वो इस शो के माध्यम से पॉपुलर होने लगती है, तो वहीं उसकी पारिवारिक ज़िंदगी में उलझने बढ़ती जाती हैं। जहां पति दिन में नौकरी करता है, तो सुलु को अपनी नौकरी के लिए रात में निकलना पड़ता है। ऐसे में अपनी जॉब और परिवार के बीच सुलु कैसे सामंजस्य बैठाती है? किन उतार-चढ़ाव से उसे गुज़रना पड़ता है? इन सवालों के जवाब के लिए फिल्म देखनी होगी। 

समीक्षा 

बतौर निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने कुछ शॉर्ट फिल्म्स ही बनी है। ‘तुम्हारी सुलु’ उनकी पहली बॉलीवुड फिल्म है। फिल्म का फर्स्ट हाफ अच्छा है, लेकिन सेकंड हाफ में वो कुछ कमज़ोर पड़ गए हैं। लोकेशन और कैमरावर्क तारीफ़ के काबिल है। स्क्रिप्ट पर थोड़ा और काम करने की ज़रूरत थी। क्लाइमैक्स बेहतर किया जा सकता था। 

अब बात करें अभिनय की, तो विद्या बालन ने ‘सुलु’ के किरदार को बेहतरीन तरीक़े से निभाया है। आम महिला के किरदार को जिस सहजता से निभाया है, वो काबिल-ए-तारीफ़ है। वहीं ‘सुलु’ के पति बने ‘अशोक’ के किरदार में मानव कौल ने जान फूंक दी है। मानव ने यह भी साबित किया कि उनके जैसी प्रतिभा का उचित उपयोग नहीं हो पाया है। बॉलीवुड को उनकी प्रतिभा का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा बाकी के कलाकारों का भी काम अच्छा है। 

फिल्म का संगीत ठीक है। ‘बन जा तू मेरी रानी’ और ‘हवा-हवाई’ लोगों की ज़बान पर चढ़ गए हैं, लेकिन बाकी के भी गाने फिल्म के साथ ठीक-ठाक रहे हैं। 

ख़ास बात

विद्या बालन के बेजोड़ अभिनय के लिए यह फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए। सीधी-सादी सी कहानी है, जिसे देख कर लगता है कि अपने आस-पास कहीं तो इन किरदारों और कहानियों को देखा है। 

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