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फिल्म समीक्षा : रेड

अजय देवगन ने साल 2018 का खाता फिल्म ‘रेड’ से खोला है। बीते साल आई उनकी फिल्म ‘गोलमाल अगेन’ ने बॉक्स ऑफिस पर जोरदार धमाका किया था। अब इनकम टैक्स ऑफिसर अमय पटनायक के रूप में एक बार फिर अजय हाजिर हैं। ‘नो वन किल्ड जेसिका’ के निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने इस फिल्म का निर्देशक किया है, तो इसके डायलॉग ‘पिंक’ और ‘एयरलिफ्ट’ सरीखी फिल्में लिख चुके रितेश शाह ने लिखे हैं। अजय देवगन के साथ सौरभ शुक्ला की जुगलबंदी वाली इस फिल्म की आइए करते हैं समीक्षा...

फिल्म रेड में अजय देवगन

फिल्म : रेड
निर्माता : अभिषेक पाठक, भूषण कुमार, किशन कुमार
निर्देशक : राजकुमार गुप्ता
कलाकार : अजय देवगन, सौरभ शुक्ला, इलियाना डिक्रूज़
संगीत : अमित त्रिवेदी, तनिष्क बागची
जॉनर : क्राइम थ्रिलर
रेटिंग : 4/5



नो वन किल्ड जेसिका’, ‘घनचक्कर’, ‘आमिर’ सरीखी फिल्मों का निर्देशन करने वाले राजकुमार गुप्ता के निर्देशन में बनी फिल्म रेड इस सप्ताह रिलीज़ हो गई है। अजय देवगन की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म क्राइम थ्रिलर है। यह फिल्म 80 के दशक में लखनऊ में घटी एक सच्ची घटना पर आधारित है। 

कहानी 

जैसा कि पहले ही बता चुके हैं कि यह फिल्म 80 के दशक में लखनऊ में पड़े एक छापे की असल कहानी पर आधारित है। फिल्म में दिखाया जाता है कि एक इनकम टैक्स ऑफिसर अमय पटनायक यानी अजय देवगन, सासंद रामेश्वर सिंह ऊर्फ राजाजी सिंह यानी सौरभ शुक्ला के यहां अपनी टीम के साथ छापा मारता है। 

दरअसल, राजाजी ने 420 करोड़ रुपए का कालाधन छुपा कर रखा है। राजाजी खुद को बचाने के लिए पूरा ज़ोर लगाते हैं। अमय डराते-धमकाते हैं। यहां तक कि अमय की पत्नी नीता यानी इलियाना डिक्रूज़ पर भी हमला करवाते हैं, लेकिन अमय पीछे नहीं हटता है। यहां तक कि अमय की पत्नी नीता भी उसके साथ खड़ी रहती है। 

अमय इस ‘रेड’ डालने की प्रक्रिया में किन मुश्किलों से जूझता है और वो आखिरकार कामयाब होता है या फिर नहीं। यह सब जानने के लिए आपको सिनेमाहॉल का रुख करना होगा।

समीक्षा

सबसे पहले फिल्म के निर्देशन की बात करें। कुछ सीन्स को छोड़ दिया जाए, तो फिल्म का निर्देशन उम्दा दर्जे का हुआ है। एडिट टेबल पर फिल्म की लंबाई कुछ कम हो सकती थी। मसलन, अजय और इलियाना के रोमांटिक सीन्स की ज्यादा जरूरत नहीं थी। कई बार यह सीन्स फिल्म के फ्लो को रोक रही थे। 

अभिनय की बात करें, तो अजय देवगन शानदार रहे हैं। उन्होंने अपने किरदार को अच्छी तरह निभाया है। वहीं सांसद बने सौरभ शुक्ला ने उम्दा अदाकारी की है। ख़ासतौर पर अजय और सौरभ के बीच का संवाद शानदार रहे हैं। रितेश शाह के डायलॉग ने समां बांध दिया। 

एक सीन में जब अमय, राजाजी के घर ‘रेड’ मारने जाता है, तो राजाजी कहते हैं, ‘इस घर में सरकारी अफसर मच्छर मारने नही आ सकता...तुम रेड मारने आए हो, खाली हाथ जाओगे।’ इस पर अमय कहता है, ‘मैं बस अपने ससुराल से शादी वाले दिन खाली हाथ लौटा हूं, वरना जिसके घर सुबह-सुबह पहुंचा हूं, कुछ लेकर ही आया हूं।’ 

ख़ैर, रही बात इलियाना की, तो उनके लिए कुछ खास करने को था नहीं, फिर भी उन्होंने उम्मीद मुताबिक ठीक काम किया है। 

अमित त्रिवेदी और तनिष्क बागची की जुगलबंदी ने फिल्म के संगीत से सजाया है। रिलीज़ से पहले ‘नित खैर मांगा’ और ‘सानू एक पल चैन न आवे’ हिट हो गए थे। बाकी कोई ऐसा गाना नहीं है, जिसे थिएटर से बाहर निकलते हुए आप गुनगुनाएं। इस फिल्म का बैकग्राउंड उत्तर प्रदेश है, ऐसे में पंजाबी गानों का चुनाव थोड़ा खटकता है। 

ख़ास बात

अजय देवगन की दमदार एक्टिंग के दीवाने हैं, तो फिर आपके लिए यह फिल्म ‘मस्ट वॉच’ है। 

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