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डेब्यू फिल्म में आमिर खान को मिली सिर्फ इतनी फीस

इस समय यदि किसी बॉलीवुड सितारे की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सौ फीसदी मुनाफा का वादा करती है, तो वो है आमिर खान। इस वजह से आमिर को मुंह मांगी फीस भी दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि करोड़ों में फीस वसूलने वाले आमिर को उनकी पहली फिल्म के लिए कितनी फीस मिला थी?..आगे पढ़िए। 

आमिर खान की डेब्यू फिल्म फीस
मुंबई। आमिर खान को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहा जाता है। उनके बारे में ये बात आम है कि वो किसी भी फिल्म के लिए सौ प्रतिशत देते हैं। साथ ही फिल्म के हर डिपार्टमेंट में हस्तक्षेप भी करते हैं। 

शायद आमिर का यही रवैया उनकी फिल्मों को एक अलग मुकाम पर ले जाता है। साल में भले ही एक फिल्म रिलीज़ हो, लेकिन दर्शकों को आमिर की फिल्म का बेसब्री से इंतज़ार रहता है। 

अपनी इस लगन और मेहनत के लिए आमिर अच्छी-खासी रकम भी वसूलते हैं। तभी तो आमिर को उनकी मुंह-मांगी फीस दी जाती है। लेकिन आमिर ने जब अपने करियर का आगाज़ किया था, उस वक्त जो उनको फीस दी गई थी, उसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। आमिर ने अपनी फीस को लेकर खुद ही खुलासा किया। 

यूं तो आमिर ने अभिनय करियर की शुरुआत, बतौर बाल कलाकार ही कर दी थी। वो साल 1973 में आई फिल्म ‘यादों की बारात’ में बालकलाकार मौजूद थे। फिर साल 1984 में आई फिल्म ‘होली’ में भी दिखे। लेकिन बतौर मुख्य कलाकार आमिर की पहली फिल्म साल 1988 में आई ‘क़यामत से क़यामत तक’ है। 

इस फिल्म को रिलीज़ हुए तीस साल गुज़र गए। बॉलीवुड में अपनी शुरुआत को सेलीब्रेट करने के लिए आमिर मीडिया से रू-ब-रू हुए।

आमिर ने इस फिल्म के लिए मिली फीस के बारे में भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस फिल्म के लिए मुझे महज 11 हजार रुपए मिले थे। हालांकि, फिल्म रिलीज़ होने के बाद लोग उन्हें पहचानने लगे थे। 

वो आगे कहते हैं कि, हालांकि, इस सफलता के बाद भी इतने पैसे नहीं जुटा पाया कि एक कार ही खरीद सकूं। कई बार मौक़ों पर अपने चाचा की कार मांग कर उसे आया-जाया करता था। 

बता दें इस फिल्म के प्रमोशन के लिए पैसा न होने की दशा में फिल्म के प्रमोशन का जिम्मा आमिर ने खुद ही उठाया था। राज जुत्सी के साथ मिल कर आमिर ने फिल्म के पोस्टर्स को ऑटो रिक्शा के अलावा दीवारों पर चिपकाए थे। साथ ही लोगों को रोक कर उन्होंने अपनी फिल्म के बारे में जानकारी भी दी थी। 

आमिर ने फिल्म को लेकर यह भी खुलासा किया कि वो भले ही मेरी पहली फिल्म हो, लेकिन उसमें मेरा काम ही मुझे पसंद नहीं आया था। मैंने तो निर्देशक को दोबारा शूट करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी। 

दरअसल, आमिर का मानना था कि फिल्म में उनसे बेहतर काम जूही का था, तो दर्शक जूही को पसंद करेंगे और उनको नहीं। लेकिन फिल्म रिलीज़ के बाद आमिर और जूही दोनों को काफी पसंद किया गया। 

आमिर को ‘किस’ करने से जूही का इंकार

फिल्म के तीस साल पूरे होने पर निर्देशक मंजूर खान भी मौजूद थे। उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए कहा कि फिल्म के एक सीन में जूही चावला और आमिर के बीच एक ‘किस’ सीन होना था। लेकिन जूही ने आमिर को ‘किस’ करने से मना कर दिया था। 

दरअसल, ‘अकेले हैं तो क्या ग़म है’ गाने के दौरान जूही को आमिर को गाल और माथे पर ‘किस’ करना था, लेकिन जूही इसके लिए राजी नहीं हो रही थीं। 

अब जूही के इंकार के बाद फिल्म की शूटिंग को रोकनी पड़ी। मंसूर इतने परेशान थे कि पूरी यूनिट से कह दिया था कि कोई काम नहीं होगा। सब रो दो। शूटिंग रूकी, तो फिर जूही को सिचुएशन को तफ्शील से समझाया गया। आखिरकार जूही मंसूर खान की बात मानने को तैयार हो गई। जूही के हां के बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हुई।

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