अमिताभ बच्चन ने ऋषि कपूर के लिए लिखा इमोशनल ब्लॉग

अमिताभ बच्चन ने ऋषि कपूर की याद में अपने ब्लॉग पर भावुक विदाई पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने ऋषि कपूर से पहली मुलाक़ात से लेकर अस्पताल में उनसे न मिलने जाने का सारा ब्यौरा दिया है। 'चिंटू' के लिए लिखे अपने इस मेमोरियम में अमिताभ ने कई बातें साझा की हैं, जो भावुकता से भरी हैं। 

amitabh bachchan write blog for rishi kapoor after his death
अभिनेता ऋषि कपूर अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका जाना न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ी झटका है। ऋषि कपूर ने 30 अप्रैल की सुबह 8.45 पर मुंबई के एक अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मरीन लाइंस के चंदनवाड़ी शवदाह गृह में किया गया। 

ऋषि कपूर के निधन के बाद अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया, लेकिन कुछ देर बाद अपना वो ट्वीट डिलीट कर दिया। फिर देर रात उन्होंने ऋषि कपूर के नाम ब्लॉग लिखा, जिसमें ऋषि कपूर से पहली मुलाकात से लेकर और भी कई बातों की जिक्र किया है। 

अमिताभ ने शुरुआत पहली मुलाकात से की है। वो लिखे हैं, 'मैंने उन्हें उनके चैंबूर के देवनार कॉटेज में देखा था। एक ऊर्जावान, चुलबुला, शरारतभरी आंखों वाला चिंटू, ये वो उन दुर्लभ क्षणों में से हैं, जब मुझे राज जी द्वारा आमंत्रित किये जाने का सौभाग्य मिला था। फिर जब वो फिल्म 'बॉबी' की तैयारी कर रहे थे, उस दौरान अक्सर मैं उनसे आर के स्टूडियो में मिलता था। इस स्टूडियो का पहली मंजिल पर राज जी का बड़ा और मशहूर मेकअप रूम था, वहीं पर वह मेहनती उत्साही नौजवान, जो हर तरह से सीखने के लिए तैयार रहता था।'

उन्होंने लिखा, 'उनकी चाल बड़ी ही आत्मविश्वासी और दृढ़ थी .. एक सहज और शैली जो उनके दादा, महान पृथ्वी राज जी के समान थी ..चलने का तरीका, जो मैंने उनकी पिछली फिल्मों में से एक में देखा था .. मैंने यह किसी भी अन्य में नहीं पाया ..। हमने एक साथ कई फिल्मों में काम किया। जब वे अपनी लाइन्स बोलते, तो आप उनके हर शब्द पर यकीन करते ... कभी कोई विकल्प नहीं था .. उनकी वास्तविकता सवाल से परे थी ..।'

अमिताभ आगे लिखते हैं, 'और कभी कोई दूसरा नहीं हुआ, जो एक गीत को पूरी तरह से सिंक कर सकता है जैसे वो करते थे.. कभी नहीं। सेट पर उनका चंचल रवैया संक्रामक था .. यहां तक ​​कि सबसे गंभीर दृश्यों में उन्हें पता चलता है कि कॉमेडिक स्पार्क और हम सभी बस हंस पड़ते थे!'

उन्होंने आगे लिखा, 'सिर्फ सेट पर ही नहीं .. यदि आप किसी औपचारिक कार्यक्रम में उनके साथ रहे, तो वह भी वह उस माहौल को अपने अंदाज से हल्का कर देते। शूट के लिए तैयार होने तक समय होता, तो वह कार्ड्स खेलते या अपने कॉम्पलिकेटेड बैगाटेले बोर्ड को बाहर निकालते था और दूसरों को खेलने के लिए आमंत्रित करते थे .. एक प्रतियोगिता .. सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं। एक गंभीर प्रतियोगिता ..।'

अमिताभ ने लिखा, 'डायग्नोस के समय और उसके उपचार के दौरान उन्होंने कभी अपनी स्थिति पर दुख नहीं जताया.. यह हमेशा कहते 'जल्द ही मिलते हैं', बस अस्पताल का रूटीन विजिट है.. मैं जल्द ही वापस आऊंगा। जीवन का आनंद उनके जीन में था, जो उन्हें अपने पिता से विरासत में मिला था। द लीजेंड, द अल्टीमेट शोमैन द आइकोनिक राज कपूर... मैं उनसे अस्पताल में कभी मिलने नहीं गया था .. मैं उनके मुस्कुराते हुए चेहरे पर संकट नहीं देखना चाहता था, लेकिन मैं निश्चित हूं .. जब वह गए होंगे, वह एक सौम्य मुस्कान के साथ चले गए होंगे....।'


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