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सलमान 'हिट एंड रन' से बरी

तेरह साल पुराने केस से आख़िरकार अभिनेता सलमान खान को मुक्ति मिल ही गई। गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सलमान को इस केस से बरी करते हुए कहा कि इस मामले में जो सबूत पेश किए गए है, उनके आधार पर अभिनेता को दोषी ठहराना मुमक़िन नहीं था। वर्ष 2002 में हुए 'हिट एंड' रन मामले में इससे पहले सेशन कोर्ट ने उन्हें पांच साल की सज़ा सुनाई थी।

सलमान 'हिट एंड रन' से बरी
मुंबई। सलमान खान के लिए जाता साल अच्छी ख़बर लेकर आया। गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला उनके हक़ में सुनाते हुए वर्ष 2002 में हुए 'हिट एंड रन' केस से उन्हें बरी कर दिया।

इससे पहले मुंबई सेशन कोर्ट ने इसी मामले में सलमान को पांच साल की सज़ा सुनाई थी। सेशन कोर्ट के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चैलेंज किया गया। जिसकी सुनवाई दस दिसंबर को हुई।

अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष सलमान पर आरोप को साबित नहीं कर सकी। कोर्ट में फैसला सुनने के बाद सलमान रो पड़े। वे काफ़ी देर कोर्ट में बिताने के बाद शाम तक़रीबन पौने पांच बजे कोर्ट से बाहर निकले।

ग़ौरतलब है कि वर्ष 2002 में मुंबई में सलमान की तेज रफ्तार कार फुटपाथ पर चढ़ गई थी। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

सुनवाई का घटनाक्रम 

  • सबसे पहले हाईकोर्ट ने सलमान के वकील से पूछा कि क्या सलमान कोर्ट ने मौज़ूद हैं। इस सवाल का जवाब देते हुए वकील अमित देसाई ने कोर्ट से कुछ वक़्त की रियायत मांगी।
  • इसके बाद हाई कोर्ट में मौजूद अभियोजन पक्ष के वकीलों ने कहा कि फैसला चाहे जो भी हो बेल बॉन्ड भरने के लिए सलमान का कोर्ट में होना ज़रूरी है।
  • इसका जवाब देते हुए सलमान के वकीलों ने कहा कि सलमान मुंबई से दो घंटे की दूरी पर मौजूद करजत में है। यदि कोर्ट उनकी मौजूदगी चाहती है, तो यहां दो घंटे में आ सकते हैं।
  • सुनवाई के दौरान सलमान के पिता सलीम, बहन अर्पिता और अलवीरा भी हाईकोर्ट पहुंचे।
  • कोर्ट के आदेश के बाद सलमान भी दोपहर 1.24 बजे हाईकोर्ट पहुंचे।
  • दोपहर 1.36 बजे हाईकोर्ट के जस्टिस ए.आर. जोशी ने सलमान को बरी किया।
  • फैसला आते ही दोस्तों, उनकी बहन अलवीरा और बाकी लोगों ने सलमान के कंधे पर हाथ रखा। अलवीरा भावुक हो गई और सलमान रोने लगे।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

  • अभियोजन सलमान के खिलाफ सारे आरोप साबित नहीं कर सका। दोष इस तरह साबित होना चाहिए कि इस पर कोई शक न हो।
  • अभियोजन ने कुछ अहम गवाहों के बयाना दर्ज नहीं किए। घायल गवाहों से जुड़े सबूतों में भी विरोधाभास है। इसकी वजह से विारोधाभास की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • जांच भी ग़लत तरीके से हुई। जांच में कई खामियां छोड़ दी गईं जिनसे कई बातें आरोपियों के पक्ष में चली गई।
  • कोर्ट का कर्तव्य है कि अपराध संदेह के परे जाकर साबित हो।
  • निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते वक्त सबूतों का ठीक तरह से ध्यान नहीं रखा।
  • सुनवाई न्याय दिलाने के तय सिद्धांतों पर नहीं थी।
  • यह ऐसा केस नहीं है जिसमें अभियोजन ने पूरी कामयाबी के साथ सारे आरोप साबित कर दिया हों।
  • सभी सबूत परिस्थितिजन्य थे।
  • शराब पीकर गाड़ी चलाने का कोई पुख्ता सबूत अभियोजन पेश करने में नाकाम रही।
  • निचली अदालत ने रेन बार एंड रेस्टोरेंट के बिल को सबूत के तौर पर मंजूद करने के मामले में भी गलती की और पंचनामा भी ठीक से नहीं बनाया गया।

सलमान के पक्ष की दलीलें

  • कार के अंदर मौजूद लोगों की संख्या तय नहीं होने, कार की स्पीड कितनी थी, इस पर सवाल उठने, रवींद्र पाटिल और कमाल खान से जिरह नहीं होने की बचाव पक्ष की दलीलें काम आ गईं। इससे हाईकोर्ट जमानत देने की मांग पर रजामंद हो गई।
  • सलमान के वकील अमित देसाई और श्रीकांत शेवाड़े ने कहा था- कमाल खान का बयान नहीं दर्ज हुआ। रवींद्र पाटिल भी यह बताने में नाकाम रहे कि होटल से लौटते वक्त रूट क्यों बदला गया था। प्रॉसिक्यूशन निचली अदालत में यह साबित नहीं कर पाया था कि कार सलमान ही चला रहे थे।
  • गवाहियां

गवाहियां

1. मलय बाग

मलय बाग 'रेन बार' में बार अटेंडर है। उसने सलमान और उनके दोस्तों को शराब परोसने की बात कही।

2. रिजवान रखांगी

रिजवान 'रेन बार' में मैनेजर थे। उन्होंने कहा कि बार में सलमान के हाथ में गिलास देखा था। गिलास में पानी जैसा तरल पदार्थ था।

3. रामाश्रय पांडे

घटनास्थल के पास एक डेयरी चलाते हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद उन्होंने सलमान को कार की फ्रंट साइड से निकलते देखा था।

4. फ्रांसिस फर्नांडिस

घटनास्थल के करीब ही रहते हैं। उन्होंने कहा कि वे सलमान को बचपन से जानते हैं। घटना के वक्त सलमान के मुंह से शराब की बदबू नहीं आ रही थी।

5. आलोक पांडे

आलोक एक्टर चंकी पांडे के भाई हैं.उन्होंने अपने बयान में कहा कि वे सलमान से 28 सितंबर की सुबह 9.30 पर मिले। उस वक्त सलमान के मुंह से शराब की बदबू नहीं आ रही थी।

6. बालाशंकर

बालाशंकर ने सलमान का ब्लड टेस्ट किया था और उन्होंने पाया था कि सलमान के ब्लड में एल्कोहल है।

7. आर.एस. केसरकर

आरटीओ इंस्पेक्टर हैं.उन्हानें सलमान की लैंड क्रूजर गाड़ी का इंस्पेक्शन किया था।

8. कल्पेश वर्मा

मैरियट होटल के पार्किंग असिस्टेंट कल्पेश ने बताया कि उन्होंने सलमान को खड़ी गाड़ी में ड्राइविंग सीट पर बैठे देखा था.इसके जवाब में सलमान ने कहा था कि वह गाड़ी का एसी ऑन करने के लिए ड्राइविंग सीट पर बैठे थे। इसके बाद उन्होंने वहीं बैठकर अपने ड्राइवर का इंतजार किया।

9. डॉक्टर सुहास पवार

जेजे। हॉस्पिटल के पूर्व डॉक्टर सुहास पवार ने ही सलमान का ब्लड सैम्पल कलेक्ट किया था।

10 बापू बोराडे

57 साल के बापू बोराडे ही वो शख्स थे जो सलमान का ब्लड सैम्पल लेकर फोरेंसिक लैब गए थे।

11. सचिन कदम

घटनास्थल के करीब नीलसागर रेस्टोरेंट का सिक्युरिटी गार्ड। सचिन ने कहा कि उसने न तो सलमान को गाड़ी से उतरते हुए देखा और न घटना के बाद वहां से भागते।

क्या आगे?

सलमान को हाईकोर्ट रजिस्ट्रार के पास एक बॉन्ड भरना होगा, क्योंकि अब तक वे इस केस में जमानत पर थे।

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन स्पेशल लीव पिटीशन दायर कर सकता है। इसमें हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी बाकी रहे सवालों का मुद्दा उठ सकता है।

प्रॉसिक्यूशन सुप्रीम कोर्ट में भी अपील कर सकता है।

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले पर ठीक तरह से गौर करने के बाद ही सरकार इस बारे में आगे कोई कदम उठाएगी।

    बयानबाज़ी:

    जफर सरेशवाला

    पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले जफर सरेशवाला ने कहा- हाईकोर्ट ने जब बेल दी थी, तभी मैंने ये बात कही थी कि सलमान को फंसाया गया। बाद में उस पर आरोप लगाए गए थे। एक्सीडेंट में अरेस्ट किया था और फिर छोड़ दिया गया था। 15 दिन बाद उसके खिलाफ आरोप लगाए गए। उसे फंसाया गया था, क्योंकि उससे पहले हिंदुस्तान में धारा 304/1 कभी भी नहीं लगी थी। जब निेंचली अदालत में मई में सलमान को सजा सुनाई गई थी, तब जफरवाला भी अभिनेता से मिलने पहुंचे थे।


    वकील आभा सिंह

    आभा सिंह ने कहा- 13 साल बाद हाईकोर्ट मान लेता है कि गाड़ी सलमान नहीं, ड्राइवर अशोक सिंह चला रहा था। यह सवालिया निशान है। रवींद्र पाटिल का बयान खारिज क्यों कर दिया गया? उनकी मौत हो गई तो क्या अब डाइंग डिक्लेरेशन खारिज कर दिया जाएगा। मैं चाहूंगी कि महाराष्ट्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाए।


    रवींद्र नहीं भरोसे के काबिल

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि हिट एंड रन केस में एक्टर सलमान खान के खिलाफ बॉडीगार्ड रवींद्र पाटिल का बयान भरोसा करने लायक नहीं है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी बुधवार को सलमान की अपील पर फैसला लिखवाए जाने के दौरान की.बता दें कि सलमान ने सेशंस कोर्ट से मिली 5 साल की सजा के खिलाफ अपील की है।

    सलमान के बॉडीगार्ड रवींद्र पाटिल पुलिस कॉन्सटेबल थे.सलमान ने शिकायत की थी कि उन्हें अंडरवर्ल्ड से धमकियां मिलती हैं.इसलिए पाटिल को बतौर बॉडीगार्ड सलमान की ड्यूटी में लगाया गया था।

    13 साल पहले इस मामले में एफआईआर पाटिल ने ही दर्ज कराई थी। उन्होंने ही बतौर चश्मदीद गवाही दी थी।
    2007 में पाटिल की टीबी के कारण मौत हो गई।

    पाटिल का बयान

    28 सितंबर 2002 को मैं सलमान खान के बॉडीगार्ड की ड्यूटी पर था। मुझे उनके साथ ही रहना था.वे (होटल से) रात 2.15 बजे बाहर निकले। सलमान ड्राइविंग सीट पर बैठे। मैंने उनसे पूछा कि क्या वे कार चला पाएंगे? लेकिन उन्होंने मेरे सवाल को नजरअंदाज कर दिया। वे 90-100 किमी / घंटा की रफ्तार से कार चला रहे थे।

    हिल रोड पर पहुंचने से पहले एक चौराहे पर मैंने उनसे कार धीमी करने को कहा क्योंकि आगे राइट टर्न आने वाला था.उन्होंने मुझे फिर नजरअंदाज कर दिया। टर्न लेते वक्त उन्होंने कार पर कंट्रोल खो दिया और गाड़ी फुटपाथ पर चढ़ा दी।

    कार अमेरिकन एक्सप्रेस बेकरी से जा टकराई। बेकरी का शटर टूट गया .. लोग इकट्ठा हो गए और चिल्लाने लगे.मैंने लोगों को अपना आइडेंटिटी कार्ड दिखाया और कहा कि मैं पुलिसवाला हूं। इससे वे कुछ शांत हुए।

    सलमान और कमाल खान वहां से भाग गए। मैंने देखा एक शख्स गंभीर रूप से जख्मी है। चार और लोग कार के नीचे दबे हुए थे। मैंने ही पुलिस कंट्रोल रूम फोन किया और बाद में बांद्रा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यह हादसा इसलिए हुआ क्योंकि कार तेज रफ्तार में थी.आरोपी नशे में थे। वे कार को मोड़ते वक्त उसे कंट्रोल नहीं कर सके।

    पूरा मामला

    28 सितंबर, 2002 की आधी रात पार्टी कर घर लौट रहे सलमान खान की लैंड क्रूजर हिल रोड पर अमेरिकन एक्सप्रेस बेकरी में घुस गई थी.सलमान ने सुबह सरेंडर किया था। पुलिस स्टेशन से ही उनकी ज़मानत हो गई।

    घटना में नुरुल्ला शरीफ की मौत हो गई थी। अब्दुल शेख, मुस्लिम शेख मुन्नू खान, मुहम्मद कलीम घायल हो गए थे। ये सब बेकरी के बाहर फुटपाथ पर सो रहे थे।

    अब्दुल शेख के परिवार ने कहा था कि उन्हें कोर्ट के फैसले से कोई मतलब नहीं है.उन्हें तो बस 10 लाख रुपए का मुआवजा मिल जाए।

    इस केस में बॉम्बे की सेशंस कोर्ट ने सलमान को 5 साल की सजा सुनाई। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सलमान को सुनाई गई सजा पर रोक लगा दी।

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