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डायरेक्टर श्रेयस तलपड़े कैमरे के सामने भूल जाते थे अपने ही डायलॉग

साल 2014 में आई मराठी फिल्म ‘पोश्टर बॉयज़’ की हिंदी रीमेक में श्रेयस तलपड़े, सनी देओल और बॉबी देओल को न सिर्फ निर्देशित कर रहे हैं, बल्कि वो इस फिल्म में अहम किरदार में भी हैं। मज़ेदार बात यह है कि श्रेयस कैमरे के पीछे तो अपना काम अच्छी तरह से कर रहे थे, लेकिन कैमरे के सामने वो अपने ही डायलॉग भूल जाया करते थे।

फिल्म पोस्टर बॉयज़ में श्रेयस तलपड़े
मुंबई। श्रेयस तलपड़े अपकमिंग फिल्म ‘पोस्टर बॉयज़’ से बतौर निर्देशक अपनी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस फिल्म के बारे में वो कहते हैं कि शुरू में तो सिर्फ इस फिल्म से बतौर निर्माता और अभिनेता ही जुड़ने वाला था, लेकिन बाद में सनी पाजी के कहने के बाद निर्देशक भी बन गया। 

एक्टिंग के साथ डायरेक्शन करने को श्रेयस काफी कठिन काम बताते हैं। वो कहते हैं, ‘कई बार तो कैमरे के सामने मैं अपनी ही लाइनें भूल जाया करता था। यह लगाता हुआ, तो सेट पर बैठे लोगों ने कहा कि ऐसे ही चलता रहा, तो अपनी फिल्म तुम खुद ही ख़राब कर लोगे।’ 

इसके बाद मैंने सोचा कि ये तो कैमरा है, कोई ज़िंदगा तो नहीं है। रीटेक की गुंजाइश तो रहती है। इसके बाद कैमरे के सामने एक्टर और कैमरे के पीछे डायरेक्टर बन जाता था। 

श्रेयस कहते हैं कि डायरेक्शन एक स्ट्रेस बस्टर की तरह काम करता है। अपने लिखे-गढ़े किरदारों को उम्मीद से अच्छा करते देखो, तो फिर आफ ड्रीम लैंड में ही पहुंच जाते हैं। 

असल इंसीडेंट पर बनी पोस्टर बॉयज़

वहीं अपनी फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि फिल्म ‘पोस्टर बॉयज़’ रियल इंसीडेंट पर बनी फिल्म है। दरअसल, तीन कुलियों की तस्वीर एक पोस्टर पर छप गई, जिसके बाद उन तीनों की ज़िंदगी में भूचाल आ गया था। बस उसी कहानी को हंसी-मज़ाक में लपेट कर फिल्म बना दिया। 

हिंदी से पहले मराठी फिल्म आई और सफल हुई। ऐसे में सवाल यह है कि क्या कुछ श्रेयस अलग दिखाने जा रहे हैं। इसके जवाब में वो कहते हैं, ‘फिल्म की मूल कहानी तो बदली नहीं गई है, लेकिन किरदार और पृषठभूमि को ज़रूर बदला है। हालांकि, सिर्फ मराठी दर्शकों ने इस फिल्म को देखा है, तो इसकी तुलना होगा, लेकिन नब्बे फीसदी दर्शकों ने पोश्टर बॉयज़ नहीं देखी। इससे उम्मीद भी बंध जाती है।’

पाव किलो के हाथ वाले श्रेयस

श्रेयस खुद को पाव किलो का हाथ बताते हैं। इस संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक दिन किसी ने मुझ से पूछा कि फिल्म में कौन-कौन है, तो मैंने उस से कहा कि फिल्म में एक ढाई किलो का हाथ, एक डेढ़ किलो के हाथ के साथ पाव किलो का हाथ है।

अपनी ही बात पर हंसते हुए वो कहते हैं कि मेरी इस बात पर सामने वाला समझ गया कि मैं किस-किस की बात कर रहा हूं। 

सनी देओल के सामने उनकी मिमिक्री

बेहतरीन मिमिक्री आर्टिस्ट श्रेयस, जब सनी देओल को स्क्रिप्ट सुनाने गए, तो उनकी ही मिमिक्री करने लगे। इस वाकये को बताते हुए, वो कहते हैं कि सनी पाजी को मैं स्क्रिप्ट नरेट कर रहा था। अच्छा फिल्म में कुछ डायलॉग सनी पाजी के हैं, तो मैंने वो डायलॉग उनके अंदाज़ में ही पढ़ते गया। फिर जब मैंने ऊपर देखा, तो मेरा को-राइटर मुझे आंखे दिखा रहा था। तब जाकर समझा कि गड़बड़ हो गई। फिर मैंने सनी पाजी माफी मांगी, तो उन्होंने कहा ‘कोई नहीं।’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए श्रेयस कहते हैं कि सनी देओल के साथ काम करना सुखद अनुभव रहा। कम बोलते हैं, सजेशन भी देते हैं, लेकिन आप पर हावी नहीं होते हैं।

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