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बीमार समाज की दवा है ‘फेमिनिज़्म’ : कंगना रनौत

कंगना रनौत का कहना है कि ‘फेमिनिज़्म’ जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं होना चाहिए। समाज में महिला-पुरुष में समानता होनी चाहिए। आगामी फिल्म ‘सिमरन’ के लिए मीडिया से मुखातिब हुई कंगना ने ‘फेमिनिज़्म’ के बीमार समाज की दवा करार दिया। 

फिल्म सिमरन में कंगना रनौत
मुंबई। बेबाक बयानी के मशहूर कंगना रनौत इन दिनों अपनी फिल्म ‘सिमरन’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म में वो एक तलाक़शुदा महिला का किरदार निभा रही हैं। इसके अलावा अक्सर महिलाओं के अधिकारों के बारे में खुलकर बात करती हैं। इस वजह से उनको फेमिनिस्ट भी कहा जाता है। 

ऐसे में जब उनसे ‘फेमिनिज़्म’ को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, ‘हेल्दी सोसायटी में फेमिनिज़्म नाम का कॉन्सेप्ट ही नहीं होना चाहिए। दरअसल, हमारा समाज बीमार है और फेमिनिज़्म उसकी दवाई है।’

वो आगे कहती हैं, ‘स्वस्थ समाज में महिला-पुरुष के बीच समानता होनी चाहिए। आखिर एक महिला को यह साबित क्यों करना पड़े कि उसकी रगो में भी खून है। वो भी हाड़-मांस की बनी हुई है। उसकी भीतर भी कुछ सपनें हैं और उसके भी अधिकार हैं।’

बता दें कंगना रनौत की पहली फिल्म ‘गैंग्स्टर’ में भी उनके किरदार का नाम ‘सिमरन’ था और हाल ही में रिलीज़ होने वाली इस फिल्म में भी उनका नाम ‘सिमरन’ पड़ जाता है। अपनी पहली फिल्म से अभी तक के सफर के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘मेरी ज़िंदगी में ‘गैंग्स्टर’ एक अहम फिल्म रही है। उसने ही मुझे आम इंसान से ख़ास बनाया है। इस फिल्म ने मुझे वो मैजिक मोमेंट दिया है, जिसकी मुझे तलाश थी। रही बात इस फिल्म के किरदार की, तो इस किरदार की तलाश भी उस मैजिक मोमेंट तक है।’

कहा जाता है कि कामयाब इंसान अकेला होता है, तो क्या आपको अकेलापन महसूस होता है। इस सवाल पर हल्के से मुस्कुराते हुए कंगना कहती हैं, ‘नहीं, मुझे अकेलापन नहीं महसूस होता। मेरा परिवार मेरे दोस्त मेरे नज़दीक़ हैं, लेकिन मैं खुद के साथ समय बिताना पसंद करती हूं।’

वहीं अपनी मज़बूती को लेकर वो कहती हैं कि लोग मुझे स्ट्रांद वुमन कहते हैं, तो अच्छा लगता है। लेकिन यह मुझ में धीरे-धीरे ही आया। मेरे जीवन में मिले संघर्ष ने मुझे स्ट्रांग बनायाय़ अपने जीवन के सबसे बड़े डर का सामना हो जाने के बाद आप साहसी हो जाते हैं। 

वो आगे कहती हैं कि जहां तक मेरी बात है, तो जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर अलग-अलग क़िस्म के डर का सामना किया है। 

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