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फिल्म समीक्षा: सुई धागा

‘सुई-धागा’ फिल्म कहानी है मौजी (वरुण धवन) और उसकी पत्नी ममता (अनुष्का शर्मा) की। मौजी अपना परिवार चलाने के लिए एक शोरूम में काम करता है।‘दम लगा के हईशा’ बना चुके शरत कटारिया अब  फिल्म ‘सुई-धागा’ लेकर आए हैं। यह फिल्म वर्तमान उपनगरीय परिवेश में रहने वाले वाले किरदारों के सादगी भरे जीवन की कहानी कहती है। 


निर्माता : मनीष शर्मा
निर्देशक : शरत कटारिया
संगीत : अनु मलिक
कलाकार : वरुण धवन, अनुष्का शर्मा, रघुवीर यादव
रेटिंग : 4/5

कहानी

‘सुई-धागा’ एक परिवार की कहानी है, जिसके भरण-पोषण के लिए उनका मिलनसार बेटा ‘मौजी’ यानी वरुण धवन शोरूम में काम करता है। अपनी नौकरी को बचाए रखने के लिए बॉस द्वारा किए जा रहे अपमान को भी वो स्वीकार कर लेता है। ‘मौजी’ की पत्नी ‘ममता’ यानी अनुष्का शर्मा के सामने भी एक दिन ऐसा ही एक नज़ारा आता है। अपने पति की हो रही बेइज्जती से वो आहत हो जाती है। उसे इस बात का पूरा यक़ीन है कि उसका पति सम्मान के लायक है। इसलिए वह ‘मौजी’ को जॉब छोड़ने और खुद का बिजनेस शुरू करने की इच्छा जताती है।

‘मौजी’ के नौकरी छोड़ने के फैसले को घर के बाकी लोग, जैसे उसके पिता, भाई और पड़ोसी गलत ठहराते हैं। ‘मौजी’ के फैसले को सिर्फ ‘ममता’ सही ठहराती है और उसका साथ देती है।

समीक्षा


‘शॉर्ट, सिंपल और स्वीट’ इन तीम शब्दों में फिल्म को बयां किया जा सकता है। स्वावलंबन, आत्मसम्मान और डिग्नीटी के कॉन्सेप्ट पर यह फिल्म बनी है।

सबसे पहले ‘मौजी’ के आसपास मौजूद किरदारों की चर्चा। सबसे पहले ‘मौजी’ की मां (यामिनी दास), जो बेहद निराले और प्रैक्टिल किरदार वाली हैं, तो पिता (रघुबीर यादव) उनसे बिलकुल विपरीत हैं। वहीं ‘मौजी’ की पत्नी ‘ममता’, जो दृढ़ संकल्प वाली महिला है।

जहां तक अभिन्य की बात करें, तो वरुण धवन ने ‘मौजी’ का किरदार बखूबी निभाया है। अनुष्का ने भी अपने रोल के साथ न्याय किया है। इस फिल्म में यामिनी दास एक सरप्राइज़ पैकेज हैं। यह आपका दिल चुरा लेंगी।

बिना किसी ड्रामेबाजी और डायलॉगबाज़ी के बड़ी सहजता से डायरेक्टर ने इस कहानी को कह दिया। ‘मौजी’ और ‘ममता’ की कैमिस्ट्री अच्छी है। शांत, लेकिन उतनी ही मजबूत ‘ममता’, भोलाभाला ‘मौजी’।

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