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फिल्म समीक्षा: सिमरन

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक हंसल मेहता और तीन राष्ट्रीय पुरस्कार पा चुकी अदाकार कंगना रनौत की जोड़ी फिल्म ‘सिमरन’ लेकर आई है। रिलीज़ से पहले फिल्म के राइटिंग क्रेडिट्स को लेकर हुए बवाल के बाद अदाकार कंगना रनौत के अपने अतीत के बारे में बेबाक बयानी ने फिल्म को चर्चा में बनाए रखा। खैर, इस शुक्रवार फिल्म सिनेमाघरों में उतर चुकी है, तो आइए करते हैं इसकी समीक्षा...

फिल्म सिमरन में कंगना रनौत
फिल्म : सिमरन
निर्माता : भूषण कुमार, किशन कुमार, शैलेश आर सिंह, अमित अग्रवाल
निर्देशक : हंसल मेहता
कलाकार : कंगना रनौत, मार्क जस्टिस, सोहम शाह, मनु नारायण, अनीस जोशी
संगीतकार : सचिन-जिगर
जॉनर : कॉमेडी ड्रामा
रेटिंग : 3/5


कुकरी शो ‘खाना खज़ाना’ से शुरुआत करने वाले हंसल मेहता ने ‘शाहिद’, ‘सिटी लाइट्स’ और ‘अलीगढ़’ सरीखी फिल्मे बनाई। इनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ संदेश भी छिपा रहता है। इस बार हंसल राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कंगना रनौत के साथ अमेरिका की एक तलाक़शुदा महिला की कहानी लेकर आए हैं, तो फिर शुरू करते हैं फिल्म की बात। 

कहानी

अमेरिका में रहने वाली तलाक़शुदा प्रफुल्ल पटेल (कंगना रनौत) की कहानी है। प्रफुल्ल अपने माता-पिता के साथ रहती है और गुजर-बसर के लिए एख होटल में हाउसकीपिंग का काम करती है। प्रफुल्ल और उसके परिवार के बीच में लगभग अनबन बनी ही रहती है। 

दरअसल, उसका परिवार चाहती है कि वो दूसरी बार शादी कर ले, लेकिन प्रफुल्ल का शादी और रिश्तों से विश्वास उठ चुका है। इसी दौरान प्रफुल्ल अपनी दोस्त की शादी में शरीक होने के लिए लास-वेगास जाती है और वहां जुआ खेलने में अपना सारा पैसा हार जाती है। प्रफुल्ल को जुआ में इतना मज़ा आता है कि हारने बाद भी कर्जा लेकर और जुआ खेलती है। 

अब इतना कर्जा हो जाने के बाद वो इसे चुकाने के लिए चोरी करना, बैंक लूटने जैसे काम करने लगती है। तभी उसकी ज़िंदगी में कुछ-कुछ देर के लिए प्यार की दस्तक भी होती है। अब सवाल यह है कि क्या उनमें से उसे कोई सच्चा प्यार मिल पाता है? क्या वो खुद पर हुए कर्जे को चुका पाती है? 

निर्देशन/पटकथा

फिल्म का निर्देशन काबिल-ए-तारीफ है। फिल्म में लोकेशन और सिनेमैटोग्राफी भी कमाल की है। रही बात कहानी की, तो वो कमज़ोर रही। साथ ही फिल्म में कसावट नज़र नहीं आई। कई बार छुटती सी लगी। वन लाइनर्स का प्रयोग बेहतर तरीक़े से किया जा सकता था। हालांकि, इन सबके बाद भी तकरीबन दो घंटे की फिल्म आपको बोर नहीं करती। यह एक एंटरटेनिंग फिल्म है। 

अभिनय 

जहां तक बात करें कलाकारों की, तो कंगना के अलावा और कोई भी कलाकार जाना-पहचाना नहीं था। कंगना ने बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है, लेकिन बाकी के किरदारों पर भी मेहनत की जानी चाहिए थी। फिल्म में मौजूद कास्टिंग को बेहतर बनाया जा सकता था। 

संगीत

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूज़िक अच्छा है। वहीं फिल्म के गाने तो पहले आ चुके हैं, लेकिन ये जबान पर चढ़ने में कामयाब नहीं रहे हैं। 

ख़ास बात 

कंगना रनौत की अदाकारी के आप मुरीद हैं, तो फिर ये फिल्म ‘मस्ट वॉच’ है, लेकिन यदि फिल्म में हंसल मेहता एंगल ढूंढने जाएंगे, तो निराशा हाथ लगेगी। इन सबके बावजूद परिवार के साथ इस सप्ताह सिनेमा देखने जाना है, तो बाकी फिल्मों की तुलना में यह एक अच्छा विकल्प है।

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