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इस कारण अमिताभ बच्चन ने छोड़ा ‘झुंड’

अमिताभ बच्चन ने नागराज मंजुले की फिल्म ‘झुंड’ को छोड़ दिया है। ऐसा काफी कम सुनने को मिलता है कि अमिताभ बच्चन किसी फिल्म से खुद को अलग कर लें। उम्र के इस पड़ाव में भी वो अपने काम को बड़ी शिद्दत से पूरा करते हैं। आखिर किस वजह से उन्होंने नागराज मंजुले की इस बॉलीवुड डेब्यू फिल्म को छोड़ा....पढ़िए। 

अमिताभ बच्चन ने छोड़ी झुंड

मुंबई। साल 2016 में आई मराठी फिल्म ‘सैराट’ के निर्देशक नागराज मंजुले ने बीते साल घोषणा की थी, कि वो फुटबॉल कोच विजय बरसे की बायोपिक बनाने जा रहे हैं। इस फिल्म का नाम ‘झुंड’ बताया गया था। फिल्म ‘झुंड’ से नागराज मंजुले बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रहे हैं। 

फिल्म ‘झुंड’ में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में नज़र आने वाले थे, लेकिन हाल ही में अमिताभ बच्चन ने खुद को इस फिल्म से अलग कर लिया है। एक अंग्रेज़ी डेली में छपी रिपोर्ट की माने, तो अमिताभ फिल्म के मेकर्स के रवैये से खफा हो गए हैं और फिर खुद को फिल्म से अलग कर लिया। 

दरअसल, इस फिल्म के लिए अमिताभ ने पहले से ही मेकर्स को अपनी डेट्स दे रखी थी, लेकिन मेकर्स लगातार फिल्म की शूटिंग कैंसिल कर रहे थे। लगातार शूटिंग कैंसिल होने की वजह से अमिताभ द्वारा दी गई डेट्स एक एक करके निकलती चली गई। अब अमिताभ के पास बची डेट्स दूसरे निर्देशकों के पास है। ऐसे में अमिताभ फिल्म को अपना समय नहीं दे पाएंगे, लिहाजा फिल्म से खुद को अलग कर लिया। साथ ही फिल्म के लिए ली गई साइनिंग अमाउंट भी लौटा दिया। 

वहीं इस फिल्म को लेकर और भी कई दिक्कतें हैं। सबसे बड़ी मुश्किल इसकी कॉपीराइट्स है। नागराज यह फिल्म फुटबॉल कोच विजय बरसे के जीवन पर बनाना चाहते हैं। बता दें, विजय ने ‘स्लम सॉकर्स’ नाम की एख सामाजिक संस्था का गठन किया, जहां झोपड़-पट्टी में रहने वाले बच्चों को सॉकर गेम खेलना सिखाया जाता है। 

अब इस फिल्म की कहानी को लेकर मीनू कुमार ने दावा किया कि इसके राइट्स उनके पास हैं। उन्होंने कई प्रोडक्शन हाउसेस से इस फिल्म को बनाने को लेकर बात भी की, लेकिन किसी भी प्रोडक्शन हाउस ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। 

इसके अलावा सुनीता नाम की एक अन्य महिला ने भी मीनू कुमार की ही तरह इस आइडिया पर अपना हक़ जताया है। इसलिए अब दोनों के बीच फिल्म के कॉपीराइट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 

इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि फिल्म के मेकर्स के पास इस फिल्म को बनाने के लिए दो साल का समय दिया गया था, जो धीरे-धीरे समाप्त हो गया है। 

कॉपीराइट्स के अलावा फिल्म का बजट भी मेकर्स के लिए एक बड़ी समस्या है, क्योंकि प्रिंटिंग और एडवरटाइजिंग की लागत को जोड़े बिना ही फिल्म का बजट 42 करोड़ हो गया है। ताज़ा जानकारी के अनुसार फिल्म को फाइनेंशियल हेल्प के लिए प्रोड्यूसर संदीप सिंह आगे आए हैं। साथ ही फिल्म के बजट को भी काफी हद तक कम करवा दिया है।

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