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‘अब्बा डब्बा जब्बा’ नहीं था पसंद

उपासना सिंह ने फिल्म ‘जुदाई’ में एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया है, जो बोलने और सुनने में असमर्थ रहती है। वह लड़की सिर्फ ‘अब्बा डब्बा जब्बा’ ही बोल पाती है, लेकिन ये तीन जादुई शब्दों ने उपासना के किरदार को अमर कर दिया। लेकिन उपासना इस डायलॉग को बोलना नहीं चाहती थीं। आखिर ऐसा क्यों?

उपासना सिंह को नहीं बोलना था अब्बा डब्बा जब्बा

मुंबई। धारावाहिक ‘सोनपरी’ की ‘कालीपरी’, ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल शर्मा’ की ‘बुआ’, ‘माय फ्रेंड गणेशा’ की ‘गंगूताई’ के किरदार को उपासना सिंह ने जिस अंदाज़ में निभाया है, उसका कोई सानी नहीं है। 

इन टीवी धारावाहिकों के अलावा उपासना ने तकरीबन सौ से ज्यादा क्षेत्रिय और हिंदी सिनेमा में काम किया है। वैसे, तो वो जब भी परदे पर आती हैं, अपने किरदार को दर्शकों के ज़ेहन में उतार जाती हैं। 

उपासना ने ऐसा ही एक किरदार फिल्म ‘जुदाई’ में निभाया था। श्रीदेवी, अनिल कपूर, उर्मिला मातोंडकर, परेश रावल, जॉनी लीवर, कादर खान और फरीदा जलाल सरीखे कलाकारों से सजी इस फिल्म में उपासना ने बेहद छोटा, लेकिन यादगार किरदार निभाया था। 

फिल्म ‘जुदाई’ का वो किरदार आज भी लोगों के ज़ेहन में बना हुआ है। आलम तो यह है कि उपासना से इस फिल्म में उनके द्वारा बोला गया डायलॉग ‘अब्बा डब्बा जब्बा’ का मां की जाती है। हालांकि, शुरू में उपासना इस डायलॉग को लेकर असहज थीं। 

इस बारे में उपासना कहती हैं, ‘मैंने फिल्म के निर्देशक राज कंवर से कहा कि यदि ये लड़की बोल-सुन नहीं सकती, तो ‘अब्बा डब्बा जब्बा’ कैसे बोलेगी। ऐसे लोग तो ‘आ..आ..आ’ करके संवाद स्थापित करते हैं।’ 

वो आगे कहती हैं कि मेरे इस ऐतराज़ के बाद राज कंवर ने कहा कि एक बार मेरी बात मान कर देखो। यह किरदार करने में मज़ा आएगा। मुझे अजीब तो लग रहा था, लेकिन क्योंकि मैंने ड्रामेटिक एक्ट में एमए किया है और थिएटर भी करती थी। इसलिए मैंने बस अपना आउट-पुट डाला और निभा गई। 

फिर क्या, फिल्म को वो डायलॉग लोगों की ज़बान पर चढ़ गया। उपासना बताती हैं कि लोग उनसे फिल्म के इस डायलॉग को सुनने की फरमाइश करते थे। तब लगा कि ये क्या हो गया। 

उपासना खुद को खुशकिस्मत करार देते हुए कहती हैं, ‘किसी कलाकार की ज़िंदगी में एक या दो मौक़े ऐसे आते हैं, जब उसके डायलॉग से दर्शक उसे याद रखें। लेकिन मेरी ज़िंदगी में यह मौक़े कई दफा आए हैं। चाहे वो ‘माय फ्रेंड गणेशा’ की ‘गंगूताई’ हो या ‘सोनपरी’ की ‘कालीपरी’ या फिर ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल शर्मा’ की ‘बुआ’।’

इमोशलन से कॉमेडी तक

उपासना बताती हैं कि उन्होंने शुरुआत रीजनल सिनेमा से की। राजस्थानी फिल्म ‘बाई चली सासरिये’ उनकी पहली फिल्म थी। हालांकि, विकीपीडिया पर उनकी पहली फिल्म ‘बाबुल’ के रूप में दर्ज है। 

जब उनसे इस बारे में पूछा, तो उपासना ने कहा, ‘ग़लत जानकारी है। अक्सर मुझे और उपासना घोसला के बीच लोग कंफ्यूज़ होते थे। उपासना घोसला ने राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘बाबुल’ में काम किया था। मैंने नहीं।’

उपासना की पहली हिंदी फिल्म ‘आज की ताकत’ थी, जो साल 1992 में रिलीज़ हुई थी और इसका निर्देशन अनिल नागरथ ने किया था। उस दौर पर बात करते हुए उपासना ने कहा, ‘तब डकैतों की फिल्में खूब बना करती थीं। मुझे भी ऐसे ही किरदार मिले। कई बार तो फिल्मी पत्रिकाओं में मुझे लेडी अमिताभ बच्चन उपासना सिंह भी कहा जाने लगा।’

इमोशलन और एक्शन फिल्मों से धीरे-धीरे कॉमेडी किरदारों में नज़र आने लगीं। इस बारे में उपासना कहती हैं, ‘सच कहूं, तो मुझे कॉमेडी सबसे ज्यादा पसंद है। बचपन में मुझे चुटकुले सुनाने के लिए बैठा लिया जाता था। लोगों को हंसाने में मुझे काफी सुख मिलता है।’

इन दिनों ‘जियो धन धना धन’

फिलहाल एक बार फिर उपासना अपने चिरपरिचित ‘बुआ’ के किरदार में नज़र आ रही हैं। हालांकि, अबकी बार कपिल शर्मा के शो में नहीं, बल्कि सुनील ग्रोवर के क्रिकेट कॉमेडी शो में दिखाई दे रही हैं। अली असगर और उपासना सिंह फिर से मां-बेटे के किरदार में ही नज़र आ रहे हैं। 

‘जियो धन धना धन’ के बारे में उपासना कहती हैं कि मैं इस शो के टीम का हिस्सा हूं, लेकिन मैं कुछ एपीसोड्स के लिए आती हूं। वहीं शिल्पा के साथ काम करने के अनुभव के बारे में उपासना ने कहा, ‘मैं उनके साथ काफी काम कर चुकी हूं। एक बार फिर उनसे मिलकर अच्छा लगा।’ बकौल उपासना, आपको अपने काम से मतलब रखना चाहिए और उसमें ही बेस्ट देने की कोशिश बरकरार रखनी चाहिए। 

कैरी ऑन जट्टा 2 में दिखेंगी

उपासना के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स की बात करें, तो वो पंजाबी फिल्म ‘कैरी ऑन जट्टा 2’ में नज़र आएंगी। फिल्म में वो नौकरानी के किरदार में नज़र आएंगी। इस फिल्म के बारे में बात करते हुए उपासना ने कहा कि फिल्म में मैं नौकरानी के किरदार में दिखूंगी, जिसे लेकर फिल्म में काफी गलतफहमी उत्पन्न होगी।

वहीं रीजनल सिनेमा के बारे में बात करते हुए कहती हैं कि अब रीजनल फिल्मों का दायरा बढ़ रहा है। रीजनल फिल्में मैनस्ट्रीम सिनेमा को टक्कर दे रही हैं।

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